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खाली समय में पैसा कमाओं | Earn Money In Free Time.

हर व्यक्ति के पास दिन में 1 घंटे से 2 घंटे का फ्री समय होता ही है, जिसमें व्यक्ति कोई काम नहीं कर सकता है | आप अपने उसी फ्री समय का प्रयोग करके लाखों रूपए महीने कैसे कमा सकते है | आज की इस पोस्ट में हम आपको वही जानकारी देंगे तो अगर आपने आज इस पोस्ट को अच्छे से पूरा पढ़ लिया और समझ लिया तो समझो आपके फ्री समय में भी आपकी इनकम होने लगेगी |

हर किसी के पास फ्री समय कब होता है ?

सबसे पहला सवाल ये है की आप सोच रहे होंगे की सभी के पास फ्री समय नहीं हो सकता है तो आप बिलकुल ही गलत है | ऐसा कोई इंसान नहीं होगा जिसके पास फ्री समय न हो जैसे :- यदि आप अपने घर से कहीं बाहर जा रहे है, बस में बैठे हुए है और जहाँ आप जा रहे है वह तक पहुँचने में आपको 2 घंटे लगेंगे तो आप उन 2 घंटों में कुछ नहीं कर सकते है वही आपका फ्री समय है, उसी फ्री समय में बस में बैठे – बैठे आप संस्था के साथ काम कर सकते है |

मानकर चलिए आपको रात में नींद नहीं आरही है तब भी आप अपने फ्री समय में काम कर सकते है |
आप सुबह – सुबह टॉयलेट में फ्रेश होने जाते है तब भी आप 10 से 20 मिनट तो बैठते ही होंगे तो भी आप अपने इस फ्री समय में काम कर सकते है |
आप कहीं घुमने जाते है तो रास्ते में चलते – चलते कान में लीड लगाकर भी ये काम कर सकते है |
अपने घर पर खाना बनाते समय भी आप ये काम कर सकते है |
घर में कोई काम करते हुए भी ये काम कर सकते है |
ऑफिस में काम करते हुए भी ये काम कर सकत है |
कुल मिलकर बात करें ये ऐसा काम है, जिसमें आप नहीं बल्कि आपका मोबाइल फ़ोन फ्री होना चाहिए, जब भी आपका फ़ोन फ्री है, तभी आप ये काम कर सकते है और अच्छी इनकम हर महीने ले सकते है |

आखिर काम क्या करना है ?

अब आप सोच रहे होंगे कि ये तो पता चले की काम क्या करना है तो चलिए बताते है | ये संस्था जिसकी वेबसाइट पर आप ये ब्लॉग पोस्ट पढ़ रहे है “Special Child Welfare Organsation”. ये एक समाज सेवी संस्था है जो ऐसे लोगों के लिए काम करती है जो बेरोजगार है या उनकी इनकम कम है | ऐसे लोग इस संस्था का प्लेटफार्म प्रयोग करके अच्छी इनकम कर सकते है | इस संस्था के 24 YouTube चैनल है और 12 वेबसाइट है | जिनके साथ अब तक 80 लाख से भी ज्यादा लोग जुड़ चुके है जो अपने घर से ही संस्था के YouTube चैनल्स की विडियो देखकर और संस्था की 12 वेबसाइट की ब्लॉग पोस्ट पढ़कर इनकम करते है तो आप भी अपने खली समय में विडियो देख सकते है या किसी वेबसाइट पर ब्लॉग पोस्ट पढ़ सकते है | जैसे अभी आप इस ब्लॉग पोस्ट को पढ़ रहे है | बस इसी से इनकम होना शुरू हो जाती है | जो आपको संस्था हर महीने देती है |

इनकम कैसे होती है ?

अब सबसे बड़ा सवाल है कि इनकम कैसे होती है ? तो आपको बता दें अगर आपने कभी YouTube पर कोई विडियो देखी होगी तो आपको पता होगा की विडियो शुरू होने से पहले या विडियो के बीच में या विडियो के नीचे कुछ ads आती है और ऐसे ही जब आप कोई वेबसाइट खोलते है तो उसपर भी ads आती है | ये ads कंपनी ही पैसे देती है | जितने ज्यादा लोग ads को देखते है या ads पर क्लिक होती है तो उससे ही YouTubeचैनल या विडियो बनाने वाले की और वेबसाइट बनाने वाले या पोस्ट लिखने वाले की इनकम होती है | ये सभी ads गूगल के द्वारा लगाई जाती है | तो संस्था की भी इनकम इन्ही ads के द्वारा होती है | तो आपको भी जो संस्था से इनकम मिलती है वो इन्ही ads को देखने से मिलती है | यदि कोई व्यक्ति किसी ऐड को 1 मिनट तक देखता है तो भी उसको उस ऐड को देखने का पैसा मिलता है | कुछ ऐड 1 मिनट से भी छोटे होते है तो उनका तो मिलता ही मिलता है | तो ये संस्था आपसे यहीं काम करवाती है इससे आपको 2 बढे फायदे होते है | पहला 1. जब आप कोई विडियो देखते है या ब्लॉग पढ़ते है तो उससे आपको अच्छी जानकारी मिलती है जो जीवन भर आपके काम आएगी | और दूसरा 2. जब आप संस्था के किसी चैनल की YouTube विडियो या वेबसाइट की ब्लॉग पोस्ट से ही ये जानकारी लेते है तो आपको जानकारी लेने का ही हर महीने पैसे भी मिलते है |

संस्था के पास पैसे कैसे आते है ?

अब सवाल आता है की ये तो आपने देखा ही होगा की ads आते है लेकिन इन ads से होने वाली इनकम संस्था के पास कैसे आती है जो संस्था सभी लोगों को देती है | तो आपकी जानकारी के लिए बता दें संस्था का गूगल की कंपनी AdSense से अग्रीमेंट होता है, जिसमें संस्था AdSense के ads अपनी विडियो और ब्लॉग पर दिखाती है जिसके बदले में गूगल ऐडसेन्स संस्था को पैसे देती है |
मानकर चलिए जनवरी के महीने में संस्था ने 1 जनवरी से 31 जनवरी तक जितने भी रूपए के ads अपने प्लेटफार्म पर दिखाए होंगे उसकी पेमेंट संस्था को उसके अगले महीने फरबरी में 25 फरबरी से लेकर 28 फरबरी तक मिल जायेगा | ये पैसा अमेरिका से आता है तो संस्था के बैंक अकाउंट में डॉलर से कन्वर्ट होकर रुपये में जमा हो जाता है फिर जिन लोगों ने संस्था में काम किया होता है संस्था उन सभी लोगों को उनके काम के अनुसार उसके अगले महीने यानी कि मार्च में 1 मार्च को सभी के अकाउंट में भेज देती है | इस प्रकार जनवरी महीने में जो आपने काम किया होगा उसका पैसा आपको 1 मार्च को मिलेगा |

आपको पैसे कैसे मिलेंगे ?

यदि आप भी विडियो देखकर या ब्लॉग पढ़कर इनकम करना चाहते है तो उसके लिए आपको एक और ब्लॉग पोस्ट पढनी पड़ेगी, जिसमें इसकी पूरी जानकारी दी हुई है, कि आप कैसे आज ही अपना रजिस्ट्रेशन करके फ्री टाइम में काम शुरू कर सकते है | उसका लिंक नीचे दिया हुआ है |

ब्लॉग पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये |
विडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये |

 

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PM मोदी ने किया बड़ा ऐलान !! 18 से 35 साल के 6 करोड़ लोगो को मिलेगी नौकरी !! Apply Online Now!!

 

Digital India : PM Modi Announce New Job Opportunity Through Digital India Platform : आज प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार की तरफ से बड़ी खबर सामने आई है. जिसमें प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने डिजिटल इंडिया प्लेटफार्म के माध्यम से 18 से 35 साल के बेरोजगार युवा – युवतियों के लिए नौकरी का ऐलान किया .

Digital India डिजिटल इंडिया प्लेटफोर्म की शुरुआत प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी की 2014 में सरकार बनाने के बाद किया गया. डिजिटल इंडिया को नई दिशा देने और इस प्लेटफार्म के माध्यम से लोगो को जोड़ने के लिए एक वेबसाइट : digitalindia.gov.in की शुरुआत की गयी.

मोदी सरकार को अनुमान था की ये नया प्लेटफोर्म Digital India लोगो को रोजगार के अवशर प्रदान करेगा और पढ़े लिखे युवाओं को नये रोजगार के नये तरीके मिलेगें. डिजिटल इंडिया को बढावा देने के लिए मोदी सरकार ने तमाम प्रयास किये जैसे : 

  1. जन सेवा केद्रों की शुरुआत की जिससे लाखों युवा-युवतियों को रोजगार मिला .
  2. सभी के फ्री में बैंक अकाउंट खुलबायें जिससे लोगो को ऑनलाइन पेमेंट प्राप्त करने में कोई परेशानी नहीं हो.
  3. लोगो में डिजिटल इंडिया के प्रति जागरूक करने और अन्य तरीकों का लेन – देन के तरीकों को समझाने के लिए नोट बंदी जैसा बड़ा काम किया जिससे लोग नगदी के बजाये. पैसों के लेन-देन के लिए डिजिटल साधनों का प्रयोग करें और समझें की ये कितना आसान है.
  4.  डिजिटल इंडिया को बढावा देने और युवाओं को रोजगार देने के उद्देश्य से युवा कौशल की शुरुआत की गयी, जिससे युवाओं को रोजगार के आसान साधन मिल सकें.
  5. डिजिटल इंडिया को बढाने और घर-घर खुद का रोजगार खोलने के लिए लोगो को मुंद्रा लोन योजना का विकल्प दिया. जिसमी कोई भी बेरोजगार व्यक्ति जो अपना खुद का कोई व्यवसाय ( बिज़नस ) करना चाहता है तो वो जिला उद्योग केंद्र की सहायता से बिना किसी गारन्टी के अपने व्यवसाय के लिए 25 लाख रुपये तक का लोन प्राप्त कर सकता है.
Digital India : ऐसे ही और भी अनेको कार्यक्रम चलाये गए जिससे लोगो को रोजगार प्राप्त करने में आसानी हो सकें. लेकिन ये भारतियों का दुर्भाग्य है की ज्यादातर लोगो को ये पता ही नहीं है की आखिर ये डिजिटल इंडिया किया चीज है . 

तो चलिए अब हम आपको बताते है ये डिजिटल इंडिया किया है और इससे कैसे कोई भी जुड़ सकता है और पैसे कमा सकता है .
  1. सबसे पहले तो आप इस पोस्ट को पूरा पड़ने के बाद गवर्नमेंट की वेबसाइट :- http://www.digitalindia.gov.in/ पर क्लिक करके विजिट करें और देखें की गवर्नमेंट के डिजिटल इंडिया प्लेटफार्म पर इस समय क्या चल रहा है  और आप इसका कैसे फायदा उठा सकते है .
  2.  डिजिटल इंडिया केबल डिजिटल इंडिया तक ही सीमित नहीं है, इसके कई अन्य तरीके भी है जैसे – A ) ऑनलाइन काम करके पैसे कमाना यानी की अगर आप पढ़ें लिखे व्यक्ति है तो आप बच्चों को ऑनलाइन टयूसन या कोचिंग करा सकते हो अपनी खुद की वेबसाइट बनाकर या YouTube जैसे बड़े प्लेटफार्म पर अपनी एजुकेशनल विडियो डालकर. ( यहाँ क्लिक करके देखिये कैसे बनाते है ऑनलाइन टीचर )
  3. अगर आपको कंप्यूटर या इन्टनेट की जानकारी है तो आप अपना खुद का ब्लॉग बना सकते है और उसपर अपने विचार लिख सकते है और घर बैठे 50 हजार से 1 लाख रुपये महिना कमा सकते है. ( ब्लॉग की कैसे बनाये की जानकारी के लिए यहाँ क्लिक कीजिये )

ऐसे और भी तरीके है जिनसे आप पैसे कम सकते है और इसकी सबसे अच्छी बात ये है की इसमें आपको अपने घर से कहीं बाहर भी नहीं जाना पड़ता है और आप अपने घर पर रह कर भी अच्छी इनकम कर सकते है. (यहाँ क्लिक करके देखिये पूरी जानकारी ऑनलाइन काम करने की )

आज की इस पोस्ट में हम आपको बता रहे थे मोदी करकर के उस नये ऐलान के बारें में जिसके माध्यम से मोदी सरकार देख के 6 करोड़ बेरोजगार युवा-युवतियों को रोजागर प्रदान कर रही है तो उसकी जानकारी नीचे गयी है : 

नौकरी या रोजगार का प्रकार :      डिजिटल इंडिया के माध्यम से Digital India

कुल पद कितने है                :      6 करोड़

योग्यता किया होनी चाहिए      :      कक्षा 10 से पोस्ट ग्रेजुएट और इन्टरनेट चलाना आता हो

कैसे करें अप्लाई                  :      गवर्नमेंट की वेबसाइट : Digital India के माध्यम से

रजिस्ट्रेशन शुरू होने की तारिक :    जल्दी उपलब्ध होगी ( आप वेबसाइट पर जाकर चेक्क कर सकते है )

अनुमानित सैलरी क्या होगी        :  30 हजार से 1 लाख रुपये के बीच .

काम कैसे करना होगा               : ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से

कैसे मिलेगा पैसा                       : पैसे डायरेक्ट आपके बैंक अकाउंट में मिलेगा

क्या डॉक्यूमेंट चाहिए                 : आधार कार्ड, पैन कार्ड और एजुकेशनल सर्टिफिकेट्स

कैसे और कहा से होगा आवेदन    : आवेदन ऑनलाइन किया जाएगा

 

दोस्तों अगर आपका इनके अवाला कोई और सवाल है तो हमें कमेंट में लिखकर बताये. हम जल्द से जल्द आपके सभी सवालों के जवाब अपडेट करने की कोशिश करेंगे. अगर आपको ये जानकारी अच्छी लगी है तो इसे फेसबुक और WHATSAPP शेयर जरूर करें . धन्यवाद !

 

ब्लैक बॉक्स का आविष्कार किसने किया था?

महान उपलब्धि है ब्लैक बॉक्स

दोस्तों या तो आपने खुद विचार किया होगा या फिर किसी ने आप से पूछा होगा कि जब भी दुनिया के किसी कोने में विमान हादसा हो जाता है तो सबसे पहले यही प्रयास क्यों किया जाता है कि ब्लैक बॉक्स को सबसे पहले सुरक्षित रखने की बात क्यों की जाती है ?
लेकिन यदि इस विषय मे आपने किसी से या आप से किसी ने नही भी पूछा तो भी आपके मन में यह जिज्ञासा जरूर होगी कि आखिर ब्लैक बॉक्स की हकीकत क्या है
दोस्तों आप निश्चित रहें आप को आज यह जानकारी मैं अपनी अगली पंक्तियों मे ही देने वाला हूं कुछ इस तरह,,,,

ब्लैक बॉक्स और डेविड वारेन

जी हां दोस्तों आज जिस ब्लैक बॉक्स की हम यहां चर्चा कर रहे हैं उसका आविष्कार आस्ट्रेलिया के महान साइंटिस्ट डेविड वारेन ने सन 1950 के दशक में किया था ।वारेन मेलबोर्न के एरोनाटिकल रिसर्च लेबोरेट्रीज में काम करते थे ।संयोग से उसी समय पहला जेट आधारित कामर्शियल एयरक्राफ्ट “कामैट” दुर्घटना ग्रस्त हो गया था ।वारेन दुर्घटना की जांच करने वाली टीम में शामिल थे ।
तभी उनके मन में एक ख्याल आया कि क्यों न कोई ऐसा यंत्र हो जो विमान हादसे के बाद काफी समय तक दुर्घटना के कारणों को सहेज कर रखे ।।
सच कहें तो ब्लैक बॉक्स अर्थात फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर के निर्माण का कार्य तभी प्रारंभ हुआ था ।इसके बाद वह दिन भी आया जब आस्ट्रेलिया को विश्व में प्रथम बार कामर्शियल एयरक्राफ्ट में ब्लैक बॉक्स या फिर फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर लगाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ ।
और इस तरह दुनिया में ब्लैक बॉक्स का जन्म हो गया

ब्लैक बॉक्स वास्तव में क्या है?

किसी विमान हादसे की वजह का पता लगाने में दो डिवाइस बेहद महत्वपूर्ण होते हैं ।एक है एफडीआर यानी फ्लाइट डाटा रिकार्डर और दूसरा है सीवीआर यानी कॉकपिट वाइस रिकार्डर ।इसे ही ब्लैक बॉक्स कहा जाता है ।एक में कॉकपिट के अंदर की बातचीत रिकॉर्ड होती है तो दूसरी डिवाइस या सीवीआर में विमान से जुड़े आंकड़े जुटाए जाते हैं ।
ब्लैक बॉक्स का एक रोचक तथ्य यह है कि इसका रंग काला नही होता बल्कि इसका रंग नारंगी होता है ।ब्लैक बॉक्स में पानी और आग का कोई असर नहीं होता ।और तो और 20 हजार फुट दूर से इसका पता लगाया जा सकता है ।यद्यपि ब्लैक बाक्स की बैट्री केवल तीस दिन तक चलती है लेकिन इसके डाटा को सालों-साल रखा जा सकता है।

ब्लैक बॉक्स कुछ खास

ब्लैक बॉक्स को विमान मे पिछले हिस्से में लगाया जाता है ।क्यों कि यह दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना की स्थिति में यहां सबसे ज्यादा सुरक्षित होता है ।ब्लैक बॉक्स को कई महत्वपूर्ण टेस्ट से गुजरना पड़ता है ।उदाहरण के तौर पर ब्लैक बॉक्स रिकार्डर L3FA2100 ग्यारह सौ डिग्री सेल्सियस फायर में कई घंटे और 260 डिग्री सेल्सियस हीट में 10 घंटे तक रह सकता है ।
इतना ही नहीं यह माइनस 55से 70 डिग्री सेल्सियस तापमान पर भी बिना किसी रुकावट के काम करता है ।1960 में आस्ट्रेलिया पहला ऐसा देश था जहां विमानों में ब्लैक बॉक्स लगाना सख्त अनिवार्य था ।जहां तक बात भारत की है तो यहां नागर विमानन महानिदेशालय के नियमों के अनुसार 1जनवरी 2005 से सभी विमानों और हेलीकॉप्टरों में FDR तथा CVC का लगाया जाना अनिवार्य किया गया था ।

दुर्घटना के बाद
ब्लैक बॉक्स की प्राप्ति

हादसे के बाद जब विमान का ब्लैक बॉक्स मिल जाता है तो विशेषज्ञ उसे सीधा लैब ले जाते हैं।इसके बाद हादसे के कारणों की सूक्ष्म जांच की जाती है ।जिन यंत्रों इसमे महत्वपूर्ण भूमिका होती है उनमें प्रमुख हैं टावेड पिंगर लोकेटर25और ब्ल्यूफिन21 ।लोकेटर25 सिग्नल को 6000 मीटर तक की गहराई से ढूंढ लेता है तो वहीं ब्ल्यूफिन21 4500 मीटर की गहराई से ब्लैक बॉक्स को ढूंढ कर लाता है ।ध्यान रहे ब्ल्यूफिन21 को अंडर वाटर ड्रोन भी कहा जाता है ।

ब्लैक बॉक्स कुछ खास

ब्लैक बॉक्स में दुर्घटना से 25 घंटे पहले तक का रिकॉर्ड होता है
ब्लैक बॉक्स में अंडर वाटर लोकेटिअंग डिवाइस होती है जो 14000 फीट नीचे से सिग्नल भेज सकती है
ब्लैक बॉक्स को धातु के चार लेयर या परत में रखा जाता है
ब्लैक बाक्स की चार लेयर इस प्रकार होती हैं
एल्युमीनियम,सूखा बालू,स्टेनलेस स्टील और सबसे बाद मे टाइटेनियम ।
ब्लैक बॉक्स कॉकपिट के अंदर होने वाली सभी बातचीत,रेडियो कम्युनिकेशन, उड़ान का विवरण जैसे स्पीड, इंजन की स्थिति, हवा की गति, विमान की उंचाई, रडार की स्थिति आदि को रिकॉर्ड करता है ।

धन्यवाद
लेखक :के पी सिंह
13022018

दुनिया को स्मार्ट बनाने वाले खास आविष्कार भाग -3

दोस्तों अब हम अपने लेख “दुनिया को स्मार्ट बनाने वाले खास आविष्कार” की तीसरी कड़ी में आ गए हैं।इसलिए यहां पर हम कुछ और चर्चा न करके सीधे अपने लेख की अगली कड़ी में पहुचते हैं

फोटोवोलटिक सौर ऊर्जा

फोटो वोलटिक प्रभाव की खोज वैज्ञानिकों द्वारा सन 1800 में कर ली गई थी और औद्योगिक क्रांति के दौर के कुछ कारखाने सौर शक्ति का प्रयोग भाप के उत्पादन में करते थे ।लेकिन आज बेहद बड़े पैमाने पर व्यावसायिक सौर ऊर्जा संयंत्र मौजूद हैं

पवन ऊर्जा

ऊर्जा पैदा करने वाली इस तकनीक का प्रचीन इतिहास है ।संसार में पहली पवन चक्की का उल्लेख सर्व प्रथम 200 ईसा पूर्व मिलता है ।आधुनिक पवन ऊर्जा के आन्दोलन को गति 1970 के दशक में ऊर्जा संकट के बाद मिली

सोशल नेटवर्किंग

सोशल नेटवर्किंग बेवसाइट अपनी दो विशिष्टताओं के कारण जानी जाती है इनमें प्रोफाइल और मित्र सूची कम आकर्षक नही है
सन् 1997 में लांच हुई सिक्स डिग्री डाट काम सबसे शुरूआती सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट थी।माई स्पेस का उदय इसके बाद ही हुआ था ।

ग्राफिक यूजर इंटरफेसGUI

जी यू आई के पिता कहलाने वाले डगलस इंगलबारट ने 1968 में इसकी खोज की थी इसमें एक सीआईटी डिस्प्ले ,दो की बोर्ड और पहला माउस था ।इअंगलबारट के काम से प्रेरित होकर बाद में कई लोगों ने जीयूआई के डिजाइन को परिष्कृत करने में अहम भूमिका निभाई ।।

डिजिटल फोटोग्राफी /वीडियोग्राफी

तस्वीरों का शुरुआती डिजिटल स्वरूप ही वीडियो के अस्तित्व का कारण बना था ।1970 में पहला सालिड स्टेट वीडियो कैमरे का प्रोटोटाइप तैयार हुआ लेकिन 1981 में सोनी द्वारा तैयार किया गया मैविका स्टिल कैमरा वास्तव में एक वीडियो कैमरे की तरह था ।1980 के दशक के आखिर में मेगा पिक्सल सेंसर के विकास और वीडियो के भंडारण में सुधार के साथ डिजिटल फोटोग्राफी और वीडियो ग्राफी को व्यावसायिक रूप में आसान बनाया ।

रेडियो फ्रीक्वेंसी आई डेटिंटी फिकेशन

दूसरे विश्व युद्ध के समय इस तकनीक का उपयोग विमान पहचान में किया जाता था ।1970 के दशक में RFID का पहला पेटेंट कराया गया ।स्वचालित पथकर भुगतान प्रणाली में इस तकनीक के प्रयोग किए जाने के बाद 1980 के दशक में इसका व्यावसायिक रूप सामने आया था ।आज दुनियाभर के तमाम खुदरा विक्रेता इसका प्रयोग सूची बनाने में कर रहे हैं ।

जेनेटिकली माडीफाइड जीएम प्लांट्स

सन 1980 के दशक में ग्रेग जान मेडल के प्रयोग मे प्राकृतिक विकास स्वरूप जी एम पौधों का विकास हुआ ।1994 में पहले जीएम पौधे के रूप में कैलीफोरनिया मे टमाटर की एक प्रजाति विकसित कर बाजार में उतारी गई थी ।ज्यादा उत्पादन,रोग प्रतिरोधक क्षमता के चलते आज इन फसलों का बोलबाला है ।।

जैव ईंधन

इनका शुरुआती इतिहास रूडोलफ डीजल के जमाने से है जिन्होने अपना पहला इंजन मूंग फली के तेल से चलाया था ।1908 में हेनरी फोर्ड ने माडल टी नामक इंजन बनाया जो एथनॉल से से चलता था ।हालाकि जल्दी ही इन आविष्कारको को यह लग गया था कि पेट्रोल ईंधन का सबसे सशक्त माध्यम बन रहा है ।।।लेकिन आज फिर से पर्यावरण के मुद्दे के कारण जैव ईंधन का उद्योग तेजी से बढ रहा है ।।।

एटीएम

आटोमेटेड टेलर मशीन का शुरुआती संस्करण 1960 के दशक में आया था ।लेकिन तब इनसे रकम निकालने को लेकर बाध्यताओं का बोलबाला था ।लेकिन 1970 के दशक में चुम्बकीय पट्टी वाले कार्ड्स का विकास हुआ तधा कम्प्यूटर से जुड़ने के बाद इसके प्रयोग को गति मिली थी ।
आशा है इन बेमिसाल आविष्कारों के बारे में जानकर आपको खुशी मिलेगी ।आपका
धन्यवाद।।।।।।
।।।।लेखक के पी सिंह
13022018

दुनिया को स्मार्ट बनाने वाले खास आविष्कार भाग-2

दोस्तों इस लेख के पूर्व मैने आपको दुनिया को स्मार्ट बनाने वाले खास आविष्कारों के बारे में बताया था ।उसी क्रम को बढाते हुए कुछ और ऐसे ही आविष्कारों की चर्चा करने के लिए प्रस्तुत है उसी लेख की आगे की कड़ी अर्थात
दुनिया को बदल देने वाले खास आविष्कारों की प्रस्तुति का भाग दो–

ओपेन सोर्स साफ्टवेयर

इसका मतलब यह है कि बिना किसी प्रतिबंध के आपरेटिंग सिस्टम तैयार करना ।रिचर्ड स्टाल मैन ने इस प्रोजेक्ट की शुरूआत 1984 में की थी ।पहले मुफ्त साफ्टवेयर लाइसेंस का प्रकाशन भी इन्होने ही किया था ।फलस्वरूप इसके आगे लिनक्स, मोजिला विकीपीडिया आदि जारी किए गए थे ।

ल ई डी
लाइट इमीटिंग डायोडस

शीतल प्रकाश उत्सर्जित करने वाले इन छोटे स्रोतों के साथ यद्यपि 1900 के शुरूआती वर्षों से ही प्रयोग हो रहा था लेकिन यह तकनीक 1960 से पहले अव्यवहारिक ही थी ।याद रखें कैलकुलेटर पहला उत्पाद है जिसमें एल ई डी का प्रयोग किया गया ।1970/80 के दशक में तमाम उपकरणों तथा वाहनों में इसे लगाया गया ।

एल सी डी
लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले

यह तकनीक सन 1980 के उत्तरार्ध में पहली बार मानव खोज अभियान में शामिल की गई थी ।लेकिन यह भी सच है कि 1960 से पहले वैज्ञानिकों को बिजली के उपयोग द्वारा क्रिस्टल के साथ जटिल स्वरूप तैयार करने की जानकारी नही थी ।1970 के दशक में पहली एलसीडी तैयार की गई थी ।और उसके बाद यह इस कदर प्रसिद्ध हुई कि आज इसका प्रयोग घड़ी, टीवी, कम्प्यूटर वाहनों के साथ-साथ अन्य उत्पादों में भी किया जाने लगा है ।

दुनिया को स्मार्ट बनाने वाले खास आविष्कार भाग-2

कई उपग्रहों के नेटवर्क द्वारा धरती पर किसी स्थान विशेष को सटीक रूप से चिन्हित करना इस तकनीक का कमाल है।1993 में अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा 24 उपग्रहों के जीपीएस को आनलाइन लाया गया था।यद्यपि इसकी कल्पना सैन्य विभाग के लिए की गई थी लेकिन आज गैर सैन्य कार्यों में इसकी बहुतायत में जरूरत महसूस की जाती है ।आज इसी कारण यह क्षेत्र एक उद्योग की सकल ले चुका है।।कार घड़ी,मोबाइल, फोन हर जगह इस डिवाइस का प्रयोग देखा जा सकता है ।

ई कॉमर्स
आनलाइन शापिंग

आज इलेक्ट्रॉनिक कामर्स इलेक्ट्रॉनिक डाटा इंटर चेंज के बाहर विकास कर रहा है।1960 /70 के दशक में कंपनियां लेन-देन कम्प्यूटर माध्यम से करती थीं ।1980 के दशक में कम्प्यूसर्व ने अपने उपयोग कर्ताओं के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक माल तैयार किया लेकिन यह उपयोग कर्ताओं के अनुकूल नही था ।वहीं 1990 के दशक में ज्यों ही वर्ल्ड वाइड वेब और ब्राउज़र की खोज की गई तो ई कामर्स को आसमान छूने में समय नही लगा ।

मीडिया फाइल कम्प्रेशन

1970 के दशक में कम्प्यूटर वैज्ञानिकों द्वारा टेक्स्ट फाइलों को स्टोर करने के लिए इस तकनीक का विकास किया गया था ।सन् 1980 में कमेटी आफ एक्सपर्ट ने लोकप्रिय कम्प्रेशन स्टैंडर्ड तैयार किया जिसे आज हम जेपीईजी और एमपीईजी के नाम से जानते हैं

माइक्रोफाइनेंस

गरीबों या फिर कम आय वालों तक वित्तीय सेवाएं सुलभ कराने वाली यह अवधारणा सदियों से चली आ रही है ।लेकिन 1980 के दशक में इसने एक विस्तृत रूप ले लिया ।बांग्लादेश के अर्थशास्त्री मुहम्मद यूनुस ने ग्रामीण बैंक की स्थापना करके इसी के चलते ग्रामीणों में उम्मीदों की किरण ही जगमगा दी है ।

लेखक के पी सिंह
Kpsingh9775@gmail.com
13022018