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परित्यक्त नवजात शिशुओं की देखभाल में अपना सहयोग करें | Support the care of abandoned newborns

हमारे यहाँ कुछ ऐसे बच्चें पैदा होंते है | जिनमें जन्म के समय से ही कुछ गंभीर रोग होते है | इसका मुख्या कारण होता है माँ को सही खान – पान या अनुकूल परिस्तिथियों में न रहना | जिससे बच्चें के पोषण पर बहुत बूरा प्रभाव पढ़ता है |

इस प्रकार की माताएं या तो किसी गरीब परिवार से होती है या किसी झुग्गी – झोपडी में रहने वाली होती है | इनको अपना दो वक्त का भोजन भी अच्छे से नहीं मिल पाता है | इसलिए इनके गर्व में पल रहे बच्चे का विकाश रुख जाता है और वो अनेक बिमारियों का शिकार हो जाता है | जब इस प्रकार के बच्चे पैदा होते है तो इनको तुरंत इलाज की जरूरत होती है | अन्यथा इलाज के अभाब में इनकी मृत्यु तक हो जाती है |

ऐसे बच्चों को अपना सहयोग प्रदान करें |

अगर आपके आस पास इस तरीका का कोई बच्चा पैसा होता है तो उसका इलाज करानें में अपना सहयोग अवश्य प्रदान करें | जिससे किसी बच्चें का जीवन आगे चल सके | इस तरीके की सेवा करने से बहुत बड़ा पुन्य तो मिलता ही है | साथ में हमारे अन्दर एक सहयोग शक्ति का भी विकास होता है जो हमें कामयाब बनाने में बहुत बड़ी मदद सवित होती है |

 

एक का सहयोग करने से दस का सहयोग प्राप्त होता है |

सहयोग की शक्ति इतना काम करती है की अगर आप किसी एक व्यक्ति का सहयोग करते है तो आपकी सहयोग करने की जो भावना है या शक्ति है उसका इतना बड़ा प्रभाव आपके जीवन में होता है की आपके साथ 10 लोग जरूरत पढने पर आपका सहयोग करने आजाते है | इस प्रकार आपका हर  काम अपने आप भी बनता चला जाता है |

 

माता – पिता का मिलता है आशीर्वाद |

यदि कोई गरीब व्यक्ति अपनी आत्माओं से आशीर्वाद देता है तो वो 100 बार गंगा जी नहाने के बराबर होता है | यदि आप इस प्रकार किसी गरीब के बच्चे से के लिए अपना थोडा सा समय निकाल कर उसकी देखभाल या इलाज में सहयोग प्रदान कर देते है तो आपको ऐसा आशीर्वाद प्राप्त होता है तो आपके जीवन की बहुत मुश्किलों को हल कर देता है |

 

जब हम किसी जरूरत मंद व्यक्ति की मदद करते है तो हमें दिखने में तो ऐसा लगता है की हम किसी अन्य व्यक्ति की हेल्प कर रहे है | लेकिन वास्तव में हम अपनी ही मदद कर रहे होते है | ये मदद का नियम कहता है | ऐसा ही हमारे धर्म ग्रंथों में भी लिखा है कि यदि हम किसी का सहयोग करते है तो वो सहयोग वास्तव में हम अपना ही कर रहे होते है | और जब हमें जरूरत होती है तब वही सहयोग हमें दस गुना होकर वापिस मिलता है |

अगर हम मदद करेंगे तो हमें भी मदद मिलेगी | If we help we will also help.

एक बार की बात है की एक पिता और पुत्री एक गाँव में रहते थे | पिता जिसकी उम्र करीब 35 साल थी और उसकी पुत्री जिसकी उम्र करीब 8 साल थी | दोनों पिता – पुत्री एक घर में अकेले रहते थे | कहीं दूर गाँव से आकर नए गाँव में बसे थे | इसलिए उस गाँव में कोई भी उनकी जान पहचान का नहीं था | इसलिए वे दोनों ही अपने परिवार में थे | पिता बहुत ही खुश मिजाज का था और उस गाँव में अकेला था | इसलिए उसने सोचा क्यों न इस गाँव में कुछ लोगों से जान पहचान कर ली जाएँ |

तो उसने लोगों से जन पहचान बढ़ने के लिए एक फ्री औसधी देने का काम शुरू किया | जो की उसके परिवार में पहले से कोई देशी दवा देता था | यानी की उसके दादा – परदादा इस तरीके के देशी इलाज जानते थे | तो जब भी गाँव में किसी को कोई बुखार, शर्दी – खासी जैसी बिमारी होती तो वो उसके घर ही उसको देशी दावा देने चला जाता था | ये काम उसने सुबह शाम करना शुरू कर दिया था | जब भी उसे समय मिलता था तो जंगल से देशी जड़ी – बूटी खोज लाता था और उन्ही से साधारण बीमारियों की दवा बनाकर रख लेता था | बाकी समय में वो पास के शहर में ही किसी कम्पनी में नौकरी करने जाता था जिससे उनके परिवार का खर्च चलता रहता था | क्योंकि जो वो गाँव वाले लोगों को दवा देता था वो तो वह मुफ्त में ही देता था | इसके पीछे उसका केबल एक ही कारण था की जिससे नए गाँव में उसकी लोगों से जान पहचान तब भी हो जाएगी |

इस प्रकार दोनों पिता और बेटी की जिंदगी नए गाँव में अच्छे से गुजरने लगी | एक बार उसकी कंपनी ने किसी काम से पिता को 15 दिन के लिए बाहर भेज दिया | जब वो गाँव से गया तो अपने पडोसी और गाँव वालों को बोल गया कि वो उसकी बेटी का ख्याल रखें | वो 15 दिन कंपनी के काम से बाहर जा रहा है |

इस प्रकार उसकी बच्ची गाँव में ही रह गयी और वो परदेश चला गया | एक दिन अचानक उसकी बेटी बच्चों के साथ खेलती – खेलती गिर गयी और बेहोश हो गई | जब गाँव वालों ने देखा की किसकी बच्छी है तो पता चला की ये तो नए वैद्य जी की लड़की है वो तो कंपनी के काम से बहार गए है | उस समय फ़ोन नहीं होता था | इसलिए तुरंत ही कोई जानकारी नहीं दी जा सकती थी | तो गाँव वाले बुजर्ग लोगों ने बोला वैद्य जी की एक लड़की की देखभाल भी अगर हम उनके पीछे नहीं कर पाए तो हमारे जीवन का कोई मूल्य नहीं रहेगा | क्योंकि वैद्य जी अकेले ही सभी के इलाज के लिए घर – घर दौड़े चले आते थे | इसलिए गाँव से कुछ लोग लड़की को पास के अस्पताल ले गए |

पास के अस्पताल में जब डॉक्टर ने देखा तो कुछ दबाई देकर बड़े अस्पातल के लिए रवाना कर दिया कि इसका इलाज मेरे पास नहीं है | मुझे इस बच्ची की बीमारी समझ नहीं आरही है | आप इस बच्ची को तरंत ही शहर के अस्पताल ले जाईये | जब बच्ची पास के शहर के हॉस्पिटल में पहुंची और जांच हुई तो पता चला की बच्छी के दिल में छेद है | अगर 24 घंटे के अन्दर ऑपरेशन नहीं हुआ तो ये बच्ची बचेगी नहीं | जब ये बात गाँव वालों को पता चली तो उन्होंने डॉक्टर से ऑपरेशन का खर्च पूंछा तो डॉक्टर ने बताया की 20 हजार रूपए का खर्च आएगा | उस समय 20 हजार रूपए बहुत बड़ी कीमत होती थी | क्योंकि एक व्यक्ति को उस समय काम करने का 300 रूपए महिना मिलता था | यानी 10 रूपए रोज |

तो जो गाँव वाले लोग साथ में गए थे उनके पास भी इतने रूपए नहीं थे| तो उन्होंने डॉक्टर से बोला की डॉक्टर शाहब अभी तो हमारे पास इतने पैसे नहीं है | लेकिन आप ऑपरेशन की तैयारी कीजिये हम अपने गाँव जाकर शाम तक पैसे लेकर आते है |

हॉस्पिटल से एक व्यक्ति गाँव आया और उसने गाँव में जब ये पूरी बात बताई तो गाँव में किसी के भी पास इतने रूपए नहीं थे | फिर एक बुजुर्ग व्यक्ति ने पुछा अपने गाँव में कितने परिवार रहते है | तो किसी ने बताया कीअपने गाँव में टोटल 1000 परिवार रहते है | बुजुर्ग बोला एक काम कीजिये सभी परिवार से 20 – 20 रूपए लीजिये | अगर कम पड़ेंगे तो फिर कुछ और इंतजाम करेंगे |

फिर क्या था 10 लड़के पूरे गाँव में घर – घर पैसे लेने के लिए निकल गए और उन्होंने एक ही बात बोली की जो हमारे गाँव में नए वाद्य जी आये थे उनकी बेटी का ऑपरेशन होना है और 20 हजार की जरूरत है और वैद्य जी गाँव से बाहर कम्पनी के काम से गए है और ऑपरेशन आज ही होना है | इसलिए गाँव के लोगों से निर्णय किया है की हर परिवार से 20 – 20 रूपए ऑपरेशन के लिए दिया जाएँ | अब वैद्य जी को तो सभी जानते थे | क्योंकि कभी न कभी तो वो उनके घर गए ही थे | दवा देने के लिए | इसलिए किसी ने बिना कोई सवाल किये 20 रूपए निकाल कर दे दिए | इस प्रकार उसी रात को वैद्य की जी लड़की का इलाज हो गया और लड़की की जिन्दगी बच गयी |

जब कुछ दिन बाद वैद्य जी वापिस गाँव आये और उनको जब पूरी बात पता चली और जब ये सुना की 20 हजार रूपए ऑपरेशन में खर्च हुआ है तो वैद्य जी बहुत ही परेशान हो गए | क्योंकि उस समय एक सामान्य व्यक्ति 20 हजार रूपए अपने पूरे जीवन में नहीं कमा सकता था तो किसी की इतनी बड़ी उधारी कैसे चूका पाता |

जब वैद्य जी ने पूंछा की पैसे किसने दिए है तो बताया की पूरे गाँव ने दिए है | और आपको उधार नहीं दिए है | अपनी बेटी के इलाज के लिए दिए है | जब आप पूरे गाँव के लोगों का इलाज मुफ्त में करते हो तो क्या हम इतना भी नहीं कर सकते है की आपकी बेटी के इलाज के लिए 20 रूपए भी दे सकें | तो इस प्रकार वैद्य जी के ऊपर किसी का भी 20 रूपए से ज्यादा का कर्ज ही नहीं हुआ और 20 रूपए कभी किसी ने वैद्य जी से लिए नहीं |

तो आप समझ ही गए होंगे की वैद्य जी की जो मदद लोगों ने की वो उसी का परिणाम था जो वैद्य जी ने गाँव वाले लोगों की बीमारियों का इलाज फ्री में करके की थी |

 

स्पेशल चाइल्ड वेलफेयर आर्गेनाइजेशन

संस्था के उद्देश्य (Objectives of Society)

 

( ये उद्देश्य बहुद्देशीय से सम्बंधित है )

  1. समाज के तथा स्पेशल चाइल्डों के सामाजिक, मानसिक व आर्थिक व शैक्षणिक उत्थान हेतु नर्सरी, प्राथमिक, उच्चाप्राथामिक, हाई स्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक से परास्नातक शिक्षा संस्थाओं की स्थापना कर पठन-पठान की आदर्श व्यवस्था करना व उनका संचालन करना !
  2. संस्था का मुख्या उद्देश्य बालक एवं बालिकाओं विशेषकर जो सामान्य से हटकर हैं उनके शैक्षिक/सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान हेतु प्राथमिकता एवं वरीयता पर कार्य करना, उनको आधुनिक शिक्षा से जोड़ने व उनको उच्च स्तरीय ज्ञान प्रदान करना है |
  3. समाज के उपेक्षित लोगों जैसे – अंधे, कुष्ठ रोगी व मूक वधिरों विकलांगों व निराश्रित, लाचार बच्चों-वृद्धजनों के लिए कार्य करना |
  4. संस्था का उद्धेश्य शिक्षा के विकास हेतु नर्सरी, प्राईमरी शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा हेतु प्राईमरी स्कूल, जूनियर हाई स्कूल, हाई स्कूल, इंटर कॉलेज, डिग्री कॉलेज, पी०जी० कॉलेज की स्थापना करना तथा निशुल्क दूरस्थ शिक्षा, तकनीकी, व्यावसायिक, औद्योगिक एवं ग्रामोद्योगी व कृषि शिक्षा, शिक्षक-प्रशिक्षण व मदरसों व शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों, व उच्च शिक्षा हेतु नियमानुसार मान्यता प्राप्त कर विद्यालय/शोध संस्थानों आदि की स्थापना करना व उनका विधिवत संचालन करना तथा आवश्यकता पड़ने पर निशुल्क दूरस्थ शिक्षा प्रदान कर युवक-युवतियों को स्वावलम्बी एवं आत्म निर्भर बनाना |
  5. संस्था का उद्देश्य विभिन्न रोगों के सम्बन्ध में जनता को जागरूकता शिवरों, गोष्ठियों राहत शिविरों, जनजागृति शिविरों, पोलियो टीका करण, टी०बी०, कैंसर, फाइलेरिया, मलेरिया, डेंगू चिकिन पोक्स, एड्स तथा मानसिक रोग व अन्य संक्रामक रोगों व रक्तदान के बारे में जानकारी प्रदान करना तथा इनके सम्बन्ध में भ्रांतियों को लोगो के मन से दूर कर उन्हें जागरूक बनाना तथा सरकार व गैर सरकारी संस्थानों, निगम, बोर्ड तथा चिकित्सा विभाग द्वारा इनके निराकरण हेरू चलाये जा रहें कार्यक्रमों में उनका सहयोग करना |
  6. संस्था का उद्देश्य निर्धन असहाय, निराश्रित, विधवा, विकलांग महिलाओं व बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करना व उनके लिए प्रौड़ शिक्षा जैसे कार्यक्रमों का संचालन करना व बच्चों के लिए क्रीडा केन्द्रों, व्यायामशाला, पुस्तकालय, वाचनालय एवं खेल सामिग्री की उचित व्यवस्था करना |
  7. संस्था का उद्देश्य महिलाओं व बच्चों की शिक्षा के उत्तरोत्तर विकास हेतु केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार समाज कल्याण विभागों आदि से दान, अनुदान, एवं चंदा आदि प्राप्त करना एवं प्राप्त आय को संस्था के हितार्थ व्यय करना व बाल विद्यालय की स्थापना तथा सरकार द्वारा संचालित मिड दे मील योजना में सक्रिय भागीदारी करना व योजनाओं का संचालन करना |
  8. समाज की निर्धन कन्याओं का दहेज़ रहित सामूहिक विवाहों का आयोजन करना एवं परित्यक्ताओं व विधवाओं को पुर्नविवाह हेतु प्रेरित करना |
  9. विकलांगो के उपचार हेतु सरकार द्वारा चलाई जाने वाली यौजनाओं में सहायता प्रदान करना एवं निशुल्क चिकित्सा हेतु चिकित्सालय की व्यवस्था व रक्तदान शिविरों का आयोजन करना | बालआश्रम, अनाथालय एवं वृद्धाश्रम, गौशाला, नशा मुक्ति केंद्र तथा अन्य स०सेवा केन्द्रों व अन्य धर्मार्थ संस्थानों की स्थापना कर उनका संचालन करना व उन्हें स्वावलम्बी बनाना |
  10. निर्धन एवं अनाथ लोगों व पिछड़ें क्षेत्रों के विकास हेतु केन्द्रीय एवं राज्य सरकार के सम्बंधित विभागों, मंत्रालयों जैसे – स्वास्थ्य परिवार कल्याण, यूनीसेफ, हडकों, महिला एवं बाल विकास विभाग, कपार्ट, क्राई, सिप्सा, नावार्ड, नीराड, डूडा, सूडा, सिडवी, राष्ट्रीय महिला कोष, बाल विकास पुष्टाहार, महिला कल्याण एवं बाल कल्याण निधी महिला कल्याण निगम, राष्ट्रीय बाल भवन, हस्त वस्त्रशिल्प मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय, मत्स्य विभाग, समाज कल्याण बोर्ड, केंद्रीय समाज कल्याण सलाहकार बोर्ड, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, श्रम मंत्रालय, राजीव गाँधी फाउंडेशन, विश्व स्वास्थ्य संगठन, विज्ञान एवं अधिकारिता मंत्रालय, पशुपालन विभाग, उ०प्र० खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड, खादी ग्रामोद्योग आयोग, एल.आई.सी. आदि के वित्तीय सहयोग से चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं व कार्यक्रमों को चलाकर नागरिकों का सर्वागीण विकास करना |
  11. भारत सरकार द्वारा नेहरु युवा केन्द्रों के माध्यम से युवक – युवतियों को कल्याणकारी योजना की जानकारी प्रदान करना व ग्रामीण अंचल में रोजगार परक शिक्षा उपलब्ध करना व किसान, मजदूरों व जन सामान्य की समस्याओं का समाधान शासन-प्रशासन के सहयोग से समाप्त करना/कराना |
  12. संस्था का उद्देश्य पत्र, पत्रिकाओं का निशुल्क प्रकाशन कर वितरण करना |
  13. विकलांग व दृष्टिहीन बच्चों के कल्याण हेतु निशुल्क शिक्षा/रोजगार परक शिक्षा, चिकित्सा, आवास, व कृत्रिम अंग आदि की व्यवस्था करना |
  14. जल प्रबंधन, कृषि अभियंत्रण कृषि रक्षा, कृषि, आधारित ग्राम उद्योग यांत्रिक आविष्कार, अनुसंधान के सम्बन्ध में कार्य करना तथा बंजर भूमि व ऊसर भूमि सुधार कार्यक्रमों का संचालन कर भूमि को उपजाऊ व कृषि योग्य बनाना व किसान, मजदूर लोगों का सहयोग करना |
  15. प्रदूषित कुओं और जलाशयों की सफाई का अभियान चला कर पर्यावरण व प्रदूषण के सम्बन्ध में जनता में प्रचार व प्रसार करना | तथा पर्यावरण व प्रदूषण नियंत्रण के लिये वृक्षारोपण, वनीकरण व प्रदूषण नियंत्रण सम्बंधित यंत्रो एवं उपकरणों की व्यवस्था करना |
  16. शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विकास हेतु केंद्रीय एवं राज्य सरकार, निगम तथा बोर्ड आदि के सहयोग से सम्बंधित विभागों एवं मंत्रालयों द्वारा क्षेत्र के विकास हेतु विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं जैसे शुध्द पेयजल की व्यवस्था व पानी की समस्या हेतु हैण्डपंप, टंकी, लगवाना क्षेत्र को मुख्य संपर्क मार्ग से जोड़ने हेतु सड़क खंडजा तथा मलिन बस्तियों का सुधार, सफाई व शौचालयों, सामुदायिक केन्द्रों आश्रम स्थल की स्थापना करना/निर्माण करना तथा लोगों को बिजली पानी गैस आदि की बचत करने के लिए जागरूक करना व इनके द्वारा होने वाले हानि लाभ के बारे में बताना व इनके दुरुपयोग के सम्बन्ध में जागरूक करना तथा समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास करना |
  17. समाज से बेरोजगारी को दूर करने हेतु युवा वर्ग के लोगों, मजदूरों/कारीगरों को तकनीकी व ग्रामोद्योग इकाईयों की स्थापना कर संचालन करना !
  18. पर्यावरण सुधार हेतु जागरूकता शिविरों का आयोजन कर नागरिकों को पर्यावरण विकास के लिए प्रेरित करना एवं जगह-जगह वृक्षारोपण कराना एवं पर्यावरण रक्षा गोष्ठियों का आयोजन कर बढ़ते प्रदूषण को कम करने का हर सम्भव प्रयास करना तथा सामाजिक वानिकी कार्यक्रम को चलाना व खाली पड़ी ऊसर बंजर भूमि पर सघन वृक्षीकरण का कार्य कर वनीकरण को बढ़ावा देना व अवैध लकड़ी कटाई को रोकने में सरकार का सहयोग करना व पर्यावरण की रक्षा हेतु विभिन्न कार्यक्रम जैसे – ओजोन की परत क्षरण कार्यक्रम, वृक्षारोपण, भूमि अपरदन कार्यक्रम, वायु, जल, ध्वनि, मृदा तथा रेडियोधर्मी प्रदूषण की समस्या के उन्मूलन के कार्य करना |
  19. महिलाओं के सर्वागीण विकास हेतु शहरी एवं ग्राम्य क्षेत्र के पिछड़ें क्षेत्रों एवं मलिन बस्तियों में स्वच्छता, साक्षरता, परिवार नियोजन, शिशु पोषण महिला एवं बाल विकास कार्यक्रम बाल टीकाकरण कार्यक्रमों, गर्भवती महिलाओं का निःशुल्क स्वास्थ्य परिक्षण आदि कार्यक्रम चलाना तथा उनके कल्याण हेतु सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की उन्हें जानकारी देना एवं समय-समय पर जागरूकता शिविरों का आयोजन करना | सरकार के वित्तीय सहयोग से चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनों व कार्यक्रमों को चलाकर महिलाओं/नागरिकों का सर्वागीड विकास करना |
  20. महिलाओं व युवक-युवतियों को स्वरोजगार हेतु केंद्रीय एवं राज्य सरकार, निगम बोर्ड, सम्बंधित विभागों के वित्तीय सहयोग से उनके कल्याण व उन्हें आत्म निर्भर व स्वावलम्बी बनाने हेतु सुलभ रोजगार परक प्रशिक्षण जैसे सिलाई, कढाई, कताई, बुनाई, हस्तशिल्प कला, वास्तुकला दस्तकारी, दरी कालीन ड्राइंग पेंटिंग कला प्रशिक्षण तथा टंकण आशुलिपि एवं कंप्यूटर प्रशिक्षण हार्डवेयर, सॉफ्टवेर इन्टरनेट, इलेक्ट्रिक, इलेक्ट्रॉनिक्स फैशन डिजाइनिंग, संगीत व नृत्य प्रशिक्षण, महेंदी कढाई, टैक्सटाइल, डिजाइनिंग, ब्यूटिशियन व घरेलु उपकरण आदि मरम्मत का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना तथा उनमें जागरूकता पैदा करना |
  21. आश्रित महिलाओं एवं अनाथ बच्चों के कल्याण हेतु समय-समय पर विभिन्न कल्याणकारी कार्यक्रम चलाना, आंगनवाडी, बालवाडी, नारी निकेतन, प्रौढ़ शिक्षा केन्द्रों, अनौपचारिक शिक्षा कार्यक्रम सांस्कृतिक कला केन्द्रों व बालश्रमिक बच्चों के उत्थान हेतु बाल श्रमिक विद्यालय की स्थापना कर उनके उत्थान हेतु कार्य करना व भ्रूण हत्या के सम्बन्ध में जन-जागृति पैदा करना |
  22. संस्था ऐसे पाठ्यक्रमों का न तो संचालन करेगी और न ही कोई उपाधि व प्रमाण पत्र प्रदान करेगी जिसका संचालन राज्य सरकार/भारत सरकार द्वारा विधि द्वारा संस्थापित बोर्डों/विश्वविद्यालयों द्वारा किया जाता हैं संस्था ऐसा करने से पूर्व राज्य सरकार/भारत सरकार से विधिवत अनुमति प्राप्त करेगी |

सत्यपाल सिंह (अध्यक्ष / चेयरमैन)

स्पेशल चाइल्ड वेलफेयर आर्गेनाइजेशन

पंजीकरण संख्या : MAT/00239/2018-2019

Human Characteristics : मनुष्य को दूसरों की सहायता क्यों करनी चाहिए?  
नमस्कार दोस्तों में आपका सेवक ” सत्यपाल सिंह” आज आपके सामने कुछ विचार शेयर कर रहा हूँ अगर पसंद आयें तो अपनी प्रतिक्रिया कमेन्ट के माध्यम से जरूर दें!

मनुष्य दुनियाँ का सबसे होशियार, अधिक बुद्धि वाला और सब कुछ सोचने समझने की शक्ति रखने वाला जीव है | हमने अनेकों बार अपने पूर्वजों से कुछ ऐसी बातें भी सुनी है की जो जीव अच्छे कर्म करने वाला होता है उसकों मोक्ष की प्राप्ति होती है| मानव के इसी स्वाभाव के चलते प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का या मानव जीवन का उद्देश्य है कि अपने मन, वचन और काया से औरों की मदद करना |

Human Characteristics

आपने यह तो देखा ही होगा कि जो लोग दूसरों की सहायता करते हैं, वैसे व्यक्ति हमेशा सुखी, तनाव मुक्त और शांति से अपना जीवन व्यतीत करते है |ऐसे लोगो का अपनी आत्मा के साथ बहुत ज्यादा जुड़ाव होता है और उनका जीवन संतोषपूर्ण होता है। लेकिन वही दूसरी तरफ ऐसे लोगो होते है जो एक दुसरे से बहस करते है या दुसरे लोगों के स्पर्धा ( होड़ ) करते है| उनको अपने जीवन में कभी शांती नहीं मिलती और वे हमेशा ही असंतोष का जीवन व्यतीत करते रहेते है, इस प्रकार उनका पूरा जीवन दूसरों की बराबरी करने में ही निकल जाता है | इसके पीछे छिपा विज्ञान यह है कि जब कोई अपने मन, वचन और काया को दूसरों की सहायता करने के लिए उपयोग करता है, तब उसे सबकुछ मिल जाता है। उसे सांसारिक सुख-सुविधा की कमी कभी नहीं होती। धर्म की शुरूआत ओब्लाइजिंग नेचर से होती है। जब आप दूसरों के लिए कुछ करते हैं, उसी पल खुशी की शुरुआत हो जाती हैं । (Human Characteristics)

मानव जीवन
मानव जीवन का उद्देश्य जन्म-जन्मान्तर के कर्म बंधन को तोड़कर संपूर्ण मुक्ति को प्राप्त करना है। इसके लिए व्यक्ति को सबसे पहले अपनी आत्मा का ज्ञान होना चाहिए, और जिस व्यक्ति को अपनी आत्मा का ज्ञान हो जाता है वो कभी किसी के प्रति अपनी गलत भावना ही नहीं रख सकता है | क्योंकी कभी आपने खुद महसूस किया होगा कि जब आप कोई गलत काम करने वाले होते है, उससे एक पल पहेल हमें अंदर से ऐसा आभास होता है की हम जो कुछ भी करने जा रहे है वो गलत है और हमें ऐसा नहीं करना चाहिए | इसी का आत्म ज्ञान कहते है अर्थात हमारी आत्मा हमें कोई भी गलत काम करने की इजाजत नहीं देती है, लेकिन फिर भी कुछ लोग अपने स्वार्थ को बरीयता देते हुए उस काम को कर बैठते है | इसी का परिणाम होता है कि हमारी आत्मा हमसे कभी संतुष्ट नहीं होती है और हम उसी तनाव में जीने लग जाते है | अतः हमें हमेशा यह याद रखना चाहिए की ऐसा कोई भी कम हम ना करें जिससे किसी की भावना को कष्ट हो या वो कार्य उचित ना हो, वर्ना मानव जीवन का कोई अर्थ नहीं रह जाता है |

आज में आपको अपने कर्मों का एक ऐसा सच बताने जा रहा हूँ जो शायद आपको सच ना लगे, मैंने भी अपने जीवन में बहुत ऐसे काम किये जो कुछ अच्छे थे तो कुछ बुरे भी लेकिन जब से मैंने लोगो की सेवा का प्रण लिया है, और जब से लोगों को मेरी बजह से कुछ लाभ होना शुरू हुआ है, उसी दिन से मेरा एक नया जन्म हुआ है और आज में आपके सेवक से रूप में आपके सामने हूँ! वर्ना मेरे जीवन में एक दिन ऐसा भी आया था की मैं ये सोचता था की जीवन में कुछ नहीं है और इससे तो अच्छा इस जीवन से मुक्त हो जाना ही बहतर है |

मेरे पास कुछ भी नहीं रहा था और मैं पूरी तरह से अकेला, तनहा सा हो गया था , मुझे समझ नहीं आरहा था की मुझे आखिर क्या करना चाहिए, उस दिन मैंने पहली बार भगवान से प्रार्थना की थी की अब मैं अपना जीवन लोगों की सेवा में लगाना चाहता हूँ, मुझे कोई सही मार्ग बताओ और मेरी प्रार्थना स्वीकार हो गयी| लेकिन मैंने उस दिन के बाद पाया की मेरी सभी टेंशन ही ख़त्म हो गयी हो और प्रति दिन मेरी खुशिया बड़ती ही जा रही है, और आज मुझे चाहने वाले इतने लोग मुझे मिल गये है की अगर मैं किसी भी शहर में जाता हूँ तो मुझे वह मेरे कुछ साथी जरूर मिल जाते है |

कभी में सोचता था की ये दुनियाँ बहुत बड़ी है लेकिन अब तो ऐसा लगता है मानों पूरी दुनियाँ बहुत छोटी सी हो गयी है, जब चाहों वो चीज मिल जाती है, और मैं भगवान से कोई सहायता की तो उम्मीद नहीं रखता हूँ, क्योंकी मैं भलिभाती जनता हूँ कि भगवान कभी भी प्रथ्वी लोक में किसी की सहायता नहीं कर सकते है, क्योंकी ये वैसे ही है जब आपके क्लास टीचर की ड्यूटी आपके पेपरों में लगी हो और वो सब कुछ जानते हुए भी आपकी कोई मदद नहीं कर सकता है ! टीचर आपकी मदद तो नहीं कर सकता हैं लेकिन आपको बैठने और लिखने का तरीका जरूर बता सकता है, की आपको किस पोजीशन मैं बैठना चाहिए और कैसे लिखना चाहिए! तो दोंस्तों भगवान से भी आप उतनी ही उम्मीद रखें की भगवान ने आपकों यहाँ परीक्षा देने भेजा है, अब ये आपको डिसाइड करना है की आप पास होते हो या फ़ैल | और इस बात का निर्धारण आपके कर्मों से ही किया जाता है !

अतः अगर जीवन मैं हमेशा खुश रहना है तो कभी भी दूसरों की बराबरी मत करना और कभी किसी का बुरा मत करना, जितना हो सके बेसहारा लोगों की सहायता कीजिये फिर देखिये कैसे आपका जीवन चमक जाता है !  Plz Being  HUMAN.

 

धन्यवाद ! नमस्कार !
लेखक : सत्यपल सिंह

नीचे दिये विडियो में रजिस्ट्रेशन करने के बारे में सम्पूर्ण जानकारी दी हुयी है और कैसे करना है, आप इस विडियो को देखकर अपने सभी प्रश्नों के जबाज सीदे एस० पी० सिंह जी के द्वारा पा सकते है :-

https://www.youtube.com/watch?v=2H2SluAfvfc