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New Update and Rules For Our YouTube Partners, Creators and Subscribes

 

New Update and Rules For Our YouTube Partners, Creators and Subscribes : नमस्कार दोंस्तों, मैं, एस०पी० सिंह आपका SPL LIVE LEARNING और SPECIAL CHILD WELFARE ORGANIZATION में स्वागत करता हूँ !
जैसा की आप सभी जानते है, स्पेशल चाइल्ड वेलफेयर आर्गेनाइजेशन एक ऐसी संस्था है जो गरीबों और बेरोजगार लोगो के द्वारा बनाई गई है, और इससे जुड़ने वाले प्रत्येक व्यक्ति को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है !
जिसमें आप ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों प्रकार के रोजगार पाप्त कर सकते है, इसकी अधिक जानकारी के लिए आप संस्था की वेबसाइट www.splcwo.org पर विजिट करके पता कर सकते है !

संस्था के द्वारा उपलब्ध कराये जा रहे रोजगारों में से एक रोजगार YOUTUBE के माध्यम से आपको उपलब्ध कराया जा रहा है | जिसको आप अपने घर से मोबाइल द्वारा कर सकते है ! जिसमें कि आपके अन्दर अगर कोई ऐसा टेलेंट है जिस पर आप कोई YouTube विडियो बना सकते है तो वो विडियो संस्था द्वारा संचालित उसके 12 YouTube चैनल्स में से किसी एक पर डाली जायेगी और उस विडियो से जो भी इनकम होगी वो आप सीधे अपने बैंक अकाउंट में ले सकते है !! अगर आप इस काम से सम्बंधित ज्यादा जानकारी चाहते है तो आप SPL LIVE LEARNING YouTube चैनल की सभी विडियो को ध्यान से पूरा-पूरा देख लीजिये और अधिक जानकारी के लिए इस विडियो का डिस्क्रिप्शन चेक कीजिये !

आज की इस विडियो में आप सभी को खासकर उन लोगों को जो हमारे साथ YouTube पर काम कर रहे है या करना चाहते है ! उनको ये जानकारी ध्यान से देख और समझ लेनी चाहिए ! अगर आप 31 जुलाई के बाद में कोई सवाल जबाब करते है तो उनका जबाब नये नियमों के अनुसार रहेगा ! ये नियन 6 महीने या जब तक इन नियमों में कोई परिवर्तन ना किया जाए. हमारे YouTube मेम्बेर्स, पार्टनर्स और Subscribers के लिए लागू रहेंगे !

New Update and Rules For Our YouTube Partners, Creators and Subscribes : आपको एक बार फिर से बता दें की आप इन सभी नियमों को ध्यान से समझ लें वर्ना आपको अगर कोई भरी नुकसान होता है तो फिर बाद में पछताने से आपको कुछ भी हाथ नहीं लगेगा ! क्योंकि आज के समय में इन्टरनेट से जितना पैसा आप कमा सकते है उतना कहीं और से नहीं कमा सकते है तो यहाँ रिस्क भी उतना ही बड़ा होता है जो आपकी पूरी जिंदगी को खराब भी कर सकता है !! एक बात तो आप जानते ही होंगे जितना जिस काम में रिस्क होता है उससे इनकम भी उतनी ज्यादा होती है और अगर थोड़ी सी साबधानी रखी जाए और किसी भी काम को करने से पहले उसके नियम और कानून समझ लिए जाए तो वो काम रिस्क फ्री हो जाता है और बड़े ही आराम से फिर आप अच्छा काम भी कर सकते है और पैसा भी अच्छा कमाकर अपनी जिंदगी बना भी सकते है, तो चलिए अब आपको बताते है क्या है वे नये नियम –

1. जिन लोगो ने 31 जुलाई तक SPL LIVE LEARNING की सभी विडियो को पूरा – पूरा वाच किया हो यानि कि देख लिया हो और जिनमें से उन सभी विडियो जिनमें हमारे साथ YouTube पर काम करने के लिए जो दिशानिर्देश दिए है उनका ईमानदारी से पालन किया हो केबल वही लोग हमारे साथ YouTube पर काम कर सकते है ! उसके अलावा आपके किसी भी निवेदन जो YouTube पर हमारे साथ काम करने के सम्बन्ध में होगा पर विचार नहीं किया जाएगा !

2. प्रत्येक साल 1 अप्रेल से 31 जुलाई के बीच ही नये लोगों को YouTube पर हमारे साथ काम करने के लिए जोड़ा जाएगा. अतः वे सभी लोग जिन्होंने 31 जुलाई तक संस्था के ऑफिसियल YouTube चैनल SPL LIVE LEARNING की सभी विडियो को पूरा – पूरा वाच किया हो यानि कि देख लिया हो, वे अपना पहला इंट्रो विडियो चैनल की मेल id ” spllivelearning@gmail.com ” भेज सकते है ! अपना इंट्रो विडियो यानी की पहचान के विडियो के अलावा कोई दूसरा विडियो आपको इस मेल id पर नहीं भेजना है, अगर आपका इंट्रो विडियो पब्लिश हो जाता है तो आपको दूसरी E-mail ID दी जायेगी जो आपके मेंटर की मेल ID होगी, जिसपर आप अपने सभी विडियो भेजेंगे ! इंट्रो विडियो के अलावा किसी अन्य तरह का विडियो इस मेल id पर भेजा जाता है तो ऐसे सभी विडियो को रिजेक्ट कर दिया जाएगा, यानी की आपका विडियो किसी भी चैनल पर पब्लिश नहीं किया जाएगा !

3. यदि आपने हमारे चैनल की सभी टर्म एंड कंडीशन्स का पालन किया है और आपका इंट्रो विडियो 25 जुलाई तक पब्लिश नहीं हुआ है या आपके पब्लिश इंट्रो विडियो की परफोर्मेंस अच्छी नहीं रही है तो आप अपना नया, यानी की दूसरा इंट्रो विडियो बनाकर 31 जुलाई रात 12 बजे तक भेज सकते है, जिससे आपको काम करने का मौका मिल सके !

4.आप अपनी विडियो से सम्बंधित जानकारी अपने मेंटर से मेल करके प्राप्त कर सकते है, अगर आपका मेंटर आपकी बातों का जवाज नहीं देता है तो आप अपनी एक मेल सीनियर डिपार्टमेंट के लिए फॉरवर्ड कर सकते है जो आपको चैनल की मुख्या मेल id ” spllivelearning@gmail.com ” भेजनी है आपको 5 दिन के अन्दर उसका जबाब मिल जायेगा !! ध्यान रहें की आपकी मेल से Subject वाले कलम में Request For Issue about my video status या जिस भी विषय से सम्बन्धी आपकी Request है वही डालना है, जैसे अगर आपकी पेमेंट की प्रॉब्लम है तो आप Subject वाले कलम में लिखेंगे ” Request for issue about my payment” और वाकी की जानकारी आप मेल में लिखेंगे.

5. यदि आपके द्वारा चैनल को भेजी गयी सभी विडियो के व्यू 10 लाख क्रोस कर जाते है (जो विडियो मोनिटाइज चैनल्स पर है) तो उसके नेक्स्ट मंथ आपको आपकी पहली पेमेंट मिल जायेगी जिसकी अधिक जानकारी आप अपने मेंटर से प्राप्त कर सकते है !
6. यदि आपकी विडियो पर व्यू , विडियो डालने के बाद पहले 28 दिन के अन्दर चैनल पर मौजूद Subscribers की सख्या के 10% से भी कम आते है तो ऐसी विडियो को चैनल से डिलीट कर दिया जाएगा !! इसलिए आप अपना कोई भी विडियो भेजने से पहले उसकी क्वालिटी, टॉपिक और अन्य जरूरी बातों का ध्यान रखें जिससे आपकी विडियो ज्यादा से ज्यादा चले और आपको उसका ज्यादा से ज्यादा फायदा मिले !

7. आप संस्था के 12 चैनल्स में से जिस भी चैनल पर अपना विडियो पब्लिश करना चाहते है, उसी चैनल के नाम का इंट्रो आपकी विडियो में होना चाहिए और आपके विडियो का सब्जेक्ट भी उस चैनल के अनुसार ही होना चाहिए, यदि आपके विडियो का सब्जेक्ट और चैनल का इंट्रो मैच नहीं करता है तो ऐसे विडियो को रिजेक्ट कर दिया जाएगा ! या फिर इसका डिसीजन लेने का अधिकार सिर्फ आपके मेंटर का होगा की वो आपकी विडियो को पब्लिश करें या ना करें !

8. आपके द्वारा भेजी गई सभी विडियो चैनल और YOUTUBE की TERM AND CONDITIONS और COMMUNITY GUIDELINES के अनुसार होनी चाहिए, इसलिए आप एक बार YOUTUBE की सभी पॉलिसीस के बारें में अच्छी तरह से जानकारी प्राप्त करलें कि आप किस प्रकार की विडियो ही पब्लिश करा सकते है ! जिन से आपको अच्छी कमाई हो सकती है !

9. आप अपनी विडियो भेजने से पहले ये सुनिश्चित करलें की आप जो भी विडियो भेज रहें है वो आपके द्वारा बनाई हुई आपकी अपनी विडियो होनी चाहियें और आपके द्वारा भेजी गयी विडियो को प्रयोग करने और उसके सभी कॉपीराइट अधिकार आपने संस्था “SPECIAL CHILD WELFARE ORGANIZATION” और उस चैनल को दिए है जिस चैनल पर आपकी विडियो पब्लिश की गयी है उसके अलावा बिना चैनल की अनुमति के आप अपनी उस विडियो को किसी अन्य YOUTUBE चैनल या किसी दुसरे प्लेटफोर्म पर आप पब्लिश नहीं कर सकते है ! यदि आपके द्वारा भेजी गयी विडियो पर कोई और व्यक्ति या चैनल या संस्था अपना अधिकार बताती है यानी कि अपना कॉपीराइट CLAIM करती है तो उसकी जिम्मेदारी आपकी होगी और उसके द्वारा हुए नुक्सान की भरपाई भी आपको ही करनी होगी ! इसलिए ध्यान रहें कभी भी किसी और का विडियो, ऑडियो, लोगो, फोटो, या कोई अन्य सामग्री अपनी विडियो में प्रयोग ना करें !

10. यदि आपके द्वारा YOUTUBE, संस्था यानि कि ” SPECIAL CHILD WELFARE ORGANIZATION ” या संस्था के किसी भी चैनल या संस्था से जुड़े किसी व्यक्ति या किसी अन्य व्यक्ति विशेष को कोई हानि या नुक्सान पहुँचाने या कोई अन्य विवादित कार्य करने की कोशिश की जाती है तो आपकी मेम्बरशिप तुरंत निरस्त यानि कि CANCLE कर दी जायेगी और आपके द्वारा किये गए अपराध के लिए आपके खिलाप कानूनी कार्यवाही भी की जा सकती है| इस तरह के किसी भी कारण से यदि आपको कोई सजा भी होती है तो इसमें संस्था या चैनल की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी और ना ही ऐसे किसी व्यक्ति को दोबारा से संस्था में कार्य करने की अनुमति प्रदान की जायेगी !

दोस्तों मैं आशा करता हूँ आपने ये सभी नियम अच्छे से समझ लिए होंगे यदि सही से समझ में नहीं आये है तो आप इस विडियो को एक बार और देख लीजिये !!

New Update and Rules For Our YouTube Partners, Creators and Subscribes : 

सत्यपाल सिंह (अध्यक्ष / चेयरमैन)

स्पेशल चाइल्ड वेलफेयर आर्गेनाइजेशन

पंजीकरण संख्या : MAT/00239/2018-2019

स्पेशल चाइल्ड वेलफेयर आर्गेनाइजेशन

संस्था के उद्देश्य (Objectives of Society)

 

( ये उद्देश्य बहुद्देशीय से सम्बंधित है )

  1. समाज के तथा स्पेशल चाइल्डों के सामाजिक, मानसिक व आर्थिक व शैक्षणिक उत्थान हेतु नर्सरी, प्राथमिक, उच्चाप्राथामिक, हाई स्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक से परास्नातक शिक्षा संस्थाओं की स्थापना कर पठन-पठान की आदर्श व्यवस्था करना व उनका संचालन करना !
  2. संस्था का मुख्या उद्देश्य बालक एवं बालिकाओं विशेषकर जो सामान्य से हटकर हैं उनके शैक्षिक/सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान हेतु प्राथमिकता एवं वरीयता पर कार्य करना, उनको आधुनिक शिक्षा से जोड़ने व उनको उच्च स्तरीय ज्ञान प्रदान करना है |
  3. समाज के उपेक्षित लोगों जैसे – अंधे, कुष्ठ रोगी व मूक वधिरों विकलांगों व निराश्रित, लाचार बच्चों-वृद्धजनों के लिए कार्य करना |
  4. संस्था का उद्धेश्य शिक्षा के विकास हेतु नर्सरी, प्राईमरी शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा हेतु प्राईमरी स्कूल, जूनियर हाई स्कूल, हाई स्कूल, इंटर कॉलेज, डिग्री कॉलेज, पी०जी० कॉलेज की स्थापना करना तथा निशुल्क दूरस्थ शिक्षा, तकनीकी, व्यावसायिक, औद्योगिक एवं ग्रामोद्योगी व कृषि शिक्षा, शिक्षक-प्रशिक्षण व मदरसों व शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों, व उच्च शिक्षा हेतु नियमानुसार मान्यता प्राप्त कर विद्यालय/शोध संस्थानों आदि की स्थापना करना व उनका विधिवत संचालन करना तथा आवश्यकता पड़ने पर निशुल्क दूरस्थ शिक्षा प्रदान कर युवक-युवतियों को स्वावलम्बी एवं आत्म निर्भर बनाना |
  5. संस्था का उद्देश्य विभिन्न रोगों के सम्बन्ध में जनता को जागरूकता शिवरों, गोष्ठियों राहत शिविरों, जनजागृति शिविरों, पोलियो टीका करण, टी०बी०, कैंसर, फाइलेरिया, मलेरिया, डेंगू चिकिन पोक्स, एड्स तथा मानसिक रोग व अन्य संक्रामक रोगों व रक्तदान के बारे में जानकारी प्रदान करना तथा इनके सम्बन्ध में भ्रांतियों को लोगो के मन से दूर कर उन्हें जागरूक बनाना तथा सरकार व गैर सरकारी संस्थानों, निगम, बोर्ड तथा चिकित्सा विभाग द्वारा इनके निराकरण हेरू चलाये जा रहें कार्यक्रमों में उनका सहयोग करना |
  6. संस्था का उद्देश्य निर्धन असहाय, निराश्रित, विधवा, विकलांग महिलाओं व बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करना व उनके लिए प्रौड़ शिक्षा जैसे कार्यक्रमों का संचालन करना व बच्चों के लिए क्रीडा केन्द्रों, व्यायामशाला, पुस्तकालय, वाचनालय एवं खेल सामिग्री की उचित व्यवस्था करना |
  7. संस्था का उद्देश्य महिलाओं व बच्चों की शिक्षा के उत्तरोत्तर विकास हेतु केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार समाज कल्याण विभागों आदि से दान, अनुदान, एवं चंदा आदि प्राप्त करना एवं प्राप्त आय को संस्था के हितार्थ व्यय करना व बाल विद्यालय की स्थापना तथा सरकार द्वारा संचालित मिड दे मील योजना में सक्रिय भागीदारी करना व योजनाओं का संचालन करना |
  8. समाज की निर्धन कन्याओं का दहेज़ रहित सामूहिक विवाहों का आयोजन करना एवं परित्यक्ताओं व विधवाओं को पुर्नविवाह हेतु प्रेरित करना |
  9. विकलांगो के उपचार हेतु सरकार द्वारा चलाई जाने वाली यौजनाओं में सहायता प्रदान करना एवं निशुल्क चिकित्सा हेतु चिकित्सालय की व्यवस्था व रक्तदान शिविरों का आयोजन करना | बालआश्रम, अनाथालय एवं वृद्धाश्रम, गौशाला, नशा मुक्ति केंद्र तथा अन्य स०सेवा केन्द्रों व अन्य धर्मार्थ संस्थानों की स्थापना कर उनका संचालन करना व उन्हें स्वावलम्बी बनाना |
  10. निर्धन एवं अनाथ लोगों व पिछड़ें क्षेत्रों के विकास हेतु केन्द्रीय एवं राज्य सरकार के सम्बंधित विभागों, मंत्रालयों जैसे – स्वास्थ्य परिवार कल्याण, यूनीसेफ, हडकों, महिला एवं बाल विकास विभाग, कपार्ट, क्राई, सिप्सा, नावार्ड, नीराड, डूडा, सूडा, सिडवी, राष्ट्रीय महिला कोष, बाल विकास पुष्टाहार, महिला कल्याण एवं बाल कल्याण निधी महिला कल्याण निगम, राष्ट्रीय बाल भवन, हस्त वस्त्रशिल्प मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय, मत्स्य विभाग, समाज कल्याण बोर्ड, केंद्रीय समाज कल्याण सलाहकार बोर्ड, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, श्रम मंत्रालय, राजीव गाँधी फाउंडेशन, विश्व स्वास्थ्य संगठन, विज्ञान एवं अधिकारिता मंत्रालय, पशुपालन विभाग, उ०प्र० खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड, खादी ग्रामोद्योग आयोग, एल.आई.सी. आदि के वित्तीय सहयोग से चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं व कार्यक्रमों को चलाकर नागरिकों का सर्वागीण विकास करना |
  11. भारत सरकार द्वारा नेहरु युवा केन्द्रों के माध्यम से युवक – युवतियों को कल्याणकारी योजना की जानकारी प्रदान करना व ग्रामीण अंचल में रोजगार परक शिक्षा उपलब्ध करना व किसान, मजदूरों व जन सामान्य की समस्याओं का समाधान शासन-प्रशासन के सहयोग से समाप्त करना/कराना |
  12. संस्था का उद्देश्य पत्र, पत्रिकाओं का निशुल्क प्रकाशन कर वितरण करना |
  13. विकलांग व दृष्टिहीन बच्चों के कल्याण हेतु निशुल्क शिक्षा/रोजगार परक शिक्षा, चिकित्सा, आवास, व कृत्रिम अंग आदि की व्यवस्था करना |
  14. जल प्रबंधन, कृषि अभियंत्रण कृषि रक्षा, कृषि, आधारित ग्राम उद्योग यांत्रिक आविष्कार, अनुसंधान के सम्बन्ध में कार्य करना तथा बंजर भूमि व ऊसर भूमि सुधार कार्यक्रमों का संचालन कर भूमि को उपजाऊ व कृषि योग्य बनाना व किसान, मजदूर लोगों का सहयोग करना |
  15. प्रदूषित कुओं और जलाशयों की सफाई का अभियान चला कर पर्यावरण व प्रदूषण के सम्बन्ध में जनता में प्रचार व प्रसार करना | तथा पर्यावरण व प्रदूषण नियंत्रण के लिये वृक्षारोपण, वनीकरण व प्रदूषण नियंत्रण सम्बंधित यंत्रो एवं उपकरणों की व्यवस्था करना |
  16. शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विकास हेतु केंद्रीय एवं राज्य सरकार, निगम तथा बोर्ड आदि के सहयोग से सम्बंधित विभागों एवं मंत्रालयों द्वारा क्षेत्र के विकास हेतु विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं जैसे शुध्द पेयजल की व्यवस्था व पानी की समस्या हेतु हैण्डपंप, टंकी, लगवाना क्षेत्र को मुख्य संपर्क मार्ग से जोड़ने हेतु सड़क खंडजा तथा मलिन बस्तियों का सुधार, सफाई व शौचालयों, सामुदायिक केन्द्रों आश्रम स्थल की स्थापना करना/निर्माण करना तथा लोगों को बिजली पानी गैस आदि की बचत करने के लिए जागरूक करना व इनके द्वारा होने वाले हानि लाभ के बारे में बताना व इनके दुरुपयोग के सम्बन्ध में जागरूक करना तथा समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास करना |
  17. समाज से बेरोजगारी को दूर करने हेतु युवा वर्ग के लोगों, मजदूरों/कारीगरों को तकनीकी व ग्रामोद्योग इकाईयों की स्थापना कर संचालन करना !
  18. पर्यावरण सुधार हेतु जागरूकता शिविरों का आयोजन कर नागरिकों को पर्यावरण विकास के लिए प्रेरित करना एवं जगह-जगह वृक्षारोपण कराना एवं पर्यावरण रक्षा गोष्ठियों का आयोजन कर बढ़ते प्रदूषण को कम करने का हर सम्भव प्रयास करना तथा सामाजिक वानिकी कार्यक्रम को चलाना व खाली पड़ी ऊसर बंजर भूमि पर सघन वृक्षीकरण का कार्य कर वनीकरण को बढ़ावा देना व अवैध लकड़ी कटाई को रोकने में सरकार का सहयोग करना व पर्यावरण की रक्षा हेतु विभिन्न कार्यक्रम जैसे – ओजोन की परत क्षरण कार्यक्रम, वृक्षारोपण, भूमि अपरदन कार्यक्रम, वायु, जल, ध्वनि, मृदा तथा रेडियोधर्मी प्रदूषण की समस्या के उन्मूलन के कार्य करना |
  19. महिलाओं के सर्वागीण विकास हेतु शहरी एवं ग्राम्य क्षेत्र के पिछड़ें क्षेत्रों एवं मलिन बस्तियों में स्वच्छता, साक्षरता, परिवार नियोजन, शिशु पोषण महिला एवं बाल विकास कार्यक्रम बाल टीकाकरण कार्यक्रमों, गर्भवती महिलाओं का निःशुल्क स्वास्थ्य परिक्षण आदि कार्यक्रम चलाना तथा उनके कल्याण हेतु सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की उन्हें जानकारी देना एवं समय-समय पर जागरूकता शिविरों का आयोजन करना | सरकार के वित्तीय सहयोग से चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनों व कार्यक्रमों को चलाकर महिलाओं/नागरिकों का सर्वागीड विकास करना |
  20. महिलाओं व युवक-युवतियों को स्वरोजगार हेतु केंद्रीय एवं राज्य सरकार, निगम बोर्ड, सम्बंधित विभागों के वित्तीय सहयोग से उनके कल्याण व उन्हें आत्म निर्भर व स्वावलम्बी बनाने हेतु सुलभ रोजगार परक प्रशिक्षण जैसे सिलाई, कढाई, कताई, बुनाई, हस्तशिल्प कला, वास्तुकला दस्तकारी, दरी कालीन ड्राइंग पेंटिंग कला प्रशिक्षण तथा टंकण आशुलिपि एवं कंप्यूटर प्रशिक्षण हार्डवेयर, सॉफ्टवेर इन्टरनेट, इलेक्ट्रिक, इलेक्ट्रॉनिक्स फैशन डिजाइनिंग, संगीत व नृत्य प्रशिक्षण, महेंदी कढाई, टैक्सटाइल, डिजाइनिंग, ब्यूटिशियन व घरेलु उपकरण आदि मरम्मत का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना तथा उनमें जागरूकता पैदा करना |
  21. आश्रित महिलाओं एवं अनाथ बच्चों के कल्याण हेतु समय-समय पर विभिन्न कल्याणकारी कार्यक्रम चलाना, आंगनवाडी, बालवाडी, नारी निकेतन, प्रौढ़ शिक्षा केन्द्रों, अनौपचारिक शिक्षा कार्यक्रम सांस्कृतिक कला केन्द्रों व बालश्रमिक बच्चों के उत्थान हेतु बाल श्रमिक विद्यालय की स्थापना कर उनके उत्थान हेतु कार्य करना व भ्रूण हत्या के सम्बन्ध में जन-जागृति पैदा करना |
  22. संस्था ऐसे पाठ्यक्रमों का न तो संचालन करेगी और न ही कोई उपाधि व प्रमाण पत्र प्रदान करेगी जिसका संचालन राज्य सरकार/भारत सरकार द्वारा विधि द्वारा संस्थापित बोर्डों/विश्वविद्यालयों द्वारा किया जाता हैं संस्था ऐसा करने से पूर्व राज्य सरकार/भारत सरकार से विधिवत अनुमति प्राप्त करेगी |

सत्यपाल सिंह (अध्यक्ष / चेयरमैन)

स्पेशल चाइल्ड वेलफेयर आर्गेनाइजेशन

पंजीकरण संख्या : MAT/00239/2018-2019

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योजना एक संगठन चार्ट को अपने लक्ष्यों की उपलब्धि के लिए एक कोर्स में मदद करता है यह प्रक्रिया संगठन के मौजूदा कार्यों की समीक्षा के साथ शुरू होती है और यह पहचानती है कि आने वाले वर्ष में सक्रिय रूप से सुधार करने की आवश्यकता है। वहां से, योजना में परिणाम प्राप्त करना शामिल होता है, संगठन प्राप्त करना चाहता है, और इच्छित गंतव्य पर पहुंचने के लिए आवश्यक कदमों का निर्धारण करना – सफलता, चाहे वह वित्तीय दृष्टि से मापा जाता है, या लक्ष्य जो ग्राहकों की संतुष्टि में सर्वोच्च श्रेणी वाले संगठन शामिल हैं ।

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हेलो दोस्तो,
आज मैं अपने तजुर्बे को आप लोगो के साथ शेयर करने जा रहा हूँ।जी हाँ दोस्तो मैं mohit ji शेयर मार्केट में 2011 में एंटर हुआ और पिछले बर्ष 2017 को ही बंद किया है



शेयर मार्केट : मेरा तजुर्बा-

ये आर्टिकल उन सभी भाइयों के लिए है जो फिलहाल में शेयर बाज़ार में उतरे हैं या फिर उतरना चाहते है।

जैसा कि सभी लोग जानते हैं, शेयर बाज़ार जोखिमों से भरा हुआ एक दलदल है।जब मैं इसमे एंटर हुआ तो मुझे भी काफी अच्छा सोर्स लगा पैसा बनाने का और मैंने 10000₹ से इसकी शुरुआत की,मैंने कमोडिटी(commodity)को चुना और इसमें काम किया।इसमे काम करना बहुत ही सरल है औऱ साथ ही इसमें पैसा भी जल्दी औऱ ज्यादा बनता है, ऐसा हमको शुरू में लगता है। परन्तु सच्चाई इन सब से परे है।तो आज मैं आपको यही बताने जा रहा हूँ कि अगर आप शेयर मार्केट करना चाहते हैं तो मेरी बातों पर गौर कीजियेगा ये बातें आपको नुकसान से बचाने में कारगर साबित होंगी।

#1. क्या चुने ” commodity  या equity-

सबसे पहले हमको ये जानकारी होनी चाहिए कि ये दोनों होते क्या है, तो आप जान लीजिए शार्ट में कि जो कमोडिटी है वो हाई रिस्क और हाई प्रोफिट पर काम करती हैं। औऱ इक्विटी कम रिस्क औऱ कम प्रॉफिट पर काम करती है।

अगर आप कमोडिटी में काम करना चाहते हो तो आपको हाई रिस्क लेना होगा और साथ ही बैकअप मनी भी रखना होगा क्यों कि कमोडिटी में उतार चढ़ाव प्रतिदिन आते हैं और छोटे इन्वेस्टर्स के पास मनी बैकअप न होने के कारण उनका पैसा एक झटके में डूब जाता है। मनी बैकअप क्या है इसको समझते हैं-मनी बैकअप एक्स्ट्रा पैसा होता है जो बुरे वक्त या उतार चढ़ाव आने पर काम आता है। जैसे अगर ट्रेडिंग एकाउंट में फण्ड खत्म होने लगता है तो आपको पोजीशन बनाये रखने के लिए एक्स्ट्रा फण्ड डालना पड़ता है और ऐसा अक्सर छोटे इन्वेस्टर नही कर पाते जिससे वो अपना सारा पैसा चंद मिनटों में गवा बैठते हैं।

इक्विटी क्या है:-

इसमें रिस्क कम होती है लेकिन इसमे प्रॉफिट भी कम होता है। मगर लॉस से कम प्रॉफ़िट अच्छा है,इसमे पैसा कंपनी के शेयर में लगाया जाता है या ये कहे कि कंपनी का शेयर ले लिया जाता है, फिर वो शेयर दिन व दिन कंपनी की प्रॉफिट परफॉर्मेंस के हिसाब से घटता बढता रहता है मगर एक दम नही घटता है। जिससे इसमे रिस्क कम रहती है साथ ही आप इसको साल दो साल भी रख सकते हो।

#2. मेरी गलतियां-

  • कम फण्ड(पैसा) होने पर भी मैंने कमोडिटी को चुना।
  • बिना फंडामेंटल जाने ट्रेडिंग चालू की।
  • मेरे पास backup money का न होना।
  • टेक्निकल जानकारी न होना।
  • मेरे अंदर धैर्य न होना
  • मार्केट के उतार चड़ाव देख loss में पोजीशन कट कर देना।
  • कमोडिटी की जगह इक्विटी में न जाना।

जल्दी पैसा बनाने के चक्कर मे high                   risk लेना।

नोट:-  अगर आप बड़े इन्वस्टर्स हो तो ही आपको हाई रिस्क लेना चाहिए,छोटे इन्वेस्टर्स शतरंज के उस प्यादे की तरह होते हैं जो एक झटके में मारे जाते हैं।

#3. कैसे करें निवेश:-

अगर आप पैसा निवेश करना चाहते हैं तो आप कई और जगह पैसा डाल सकते हैं जैसे:-

#म्यूचल फंड्स में

#प्रॉपर्टी में

# कंपनी के ipo ico लेकर आप low risk पर     पैसा बना सकते हैं।

शेयर मार्केट : मेरा तजुर्बा तो यही कहता है कि अगर आपने शेयर मार्केट से पैसा बना भी लिया और जितनी तेजी से बनाया उतनी ही तेजी से गवाने की संभावना शेयर बाज़ार में पहले से ही मौजूद हैं।

मैंने भी बहुत पैसा बनाया और उससे ज्यादा गवाया और आखिरकार नुकसान ही हाथ लगा और ज्यादातर लोगों के साथ यही होता है अगर ऐसा न होता तो शायद इंडिया में लोगों को जॉब की कोई जरूरत ही न होती।

आशा करता हूँ कि ये आर्टिकल शेयर मार्केट : मेरा तजुर्बा किसी भाई बंधु के काम आएगा।

 

लेखक-😊

MOHIT Ji

All thanks

 

लोकप्रिय सोशल साइट्स यू ट्यूब की दास्तान

दोस्तों यहां चर्चा यू ट्यूब की होनी है लेकिन मैं इससे भी पहले आपको यह बताना चाहता हूं कि चूंकि यू ट्यूब एक सोशल नेटवर्किंग साइट है इसलिए आइए सबसे पहले यह जानने की कोशिश कि आखिरकार यह सोशल नेटवर्किंग साइट्स क्या होती हैं ?
सोशल नेटवर्किंग साइट्स लोगों को आपस मे जोड़ने वाली दूर संचार प्रणाली हैं ।इन्टरनेट के वर्तमान के दौर में इनकी बेहद अहम भूमिका से नकारा नही जा सकता ।क्योंकि इनके ही माध्यम से आज हम विश्व के किसी भी कोने में स्थित किसी भी व्यक्ति से पलक झपकते ही संपर्क साध सकते हैं ।
वर्तमान में प्रमुख सोशल नेटवर्किंग साइट्स में शामिल हैं फेसबुक, ट्विटर, आरकुट,यू ट्यूब, लिंक्ड इन,ब्लाग एवं चैट आदि ।तो आइए आज यू ट्यूब के बारे मे कुछ और भी जानते हैं क्योंकि कि हमारे इस नायाब
सोशल मीडिया साथी ने अपनी उम्र के 13 साल पूरे किए हैं आज ।

13 साल का हमारा साथी यू ट्यूब

जी हां दोस्तों लोकप्रिय वीडियो शेयरिंग वेबसाइट
यू ट्यूब को आज यानी 14 फरवरी 2018 के दिन तेरह साल पूरे हो रहे हैं ।आज ही के दिन सन 2005 मे पेपल कंपनी के तीन कर्मचारियों ने इसकी जिस जोश और जज्बे के साथ शुरुआत की थी आज यह वही नायाब दिन है ।आज यू ट्यूब को करोड़ों लोग यूज करते हैं और विज्ञान के इस अद्भुत चमत्कार को सलाम करते हैं ।

कहानी यू ट्यूब की

यू ट्यूब एक साझा वीडियो वेबसाइट है ।जहां उपयोग कर्ता वेबसाइट को देख सकता है ।वीडियो अपलोड कर सकता है एवं वीडियो क्लिप को साझा भी कर सकता है ।यू ट्यूब की स्थापना 2005 मे हुई थी ।इस बेहतरीन बेवसाइट को बनाने वाले तीन लोग हैं जिनके नाम हैं बांग्लादेश मूल के जर्मन-अमेरिकी श्री जावेद करीम,ताइवान मूल के स्टीव सेन और अमेरिकी चाड हर्ले ।दरअसल यह लोग वीडियो शेयरिंग और वीडियो देखने का सर्वसुलभ और आसान उपाय हासिल करना चाहते थे ।

14 फरवरी और यू ट्यूब की मोहब्बत

चूंकि यू ट्यूब डाट काम को 14 फरवरी से प्रारंभ किया गया था इसलिए इसका प्रेम के खास दिन वेलेंटाइन डे से भी इन्टरनल कनेक्शन बिठाया जा सकता है ।क्यों कि आज यू ट्यूब से प्यार किए बिना कोई रह ही नही सकता ।यू ट्यूब का शुरुआती मुख्यालय कैलीफोरनिया के सैनमैटियो मे स्थित एक जापानी रेस्तरां की इमारत के ऊपरी हिस्से मे था ।लेकिन आज इसका मुख्यालय कैलीफोरनिया के सैन ब्रूनो मे स्थित है ।इसकी मौजूदा CEO सुसैन वोजसिकी हैं ।

यूट्यूब और कुछ नायाब तथ्य

यू ट्यूब पर पहला वीडियो 23 अप्रैल 2005 को इसके सह संस्थापक जावेद करीम ने जारी किया था ।”मी एट द जू”नामक यह वीडियो केवल 19 सेकंड का था ।जिसे तब सैनडियागो चिड़िया घर में बनाया गया था ।

यूट्यूब पर प्रति मिनट 400 घंटे के वीडियो अपलोड किए जाते हैं ।यानी एक मिनट के अंदर इतने वीडियो अपलोड होते हैं जिनकी समय की गणना की जाए तो उन सब वीडियोज का कुल समय 400 घंटे होगा ।

13 साल के यूट्यूब के रोचक तथ्य

यू ट्यूब आज विश्व की 75 से भी ज्यादा भाषाओं में गतिमान है ।
विश्व का लगभग हर इंटर नेट यूज करने वाला यूजर इस प्लेटफार्म पर प्रतिदिन 40 मिनट व्यतीत करता है
इन्टरनेट चलाने वाली पीढ़ी के 95% तक यू ट्यूब की पहुंच है जो इस बात का संकेत है कि इस 13 साल के नायाब नायक ने हम सब को लुभाया है ।
गूगल के बाद यू ट्यूब सबसे बड़ा सर्च इंजन है
यू ट्यूब पर अपलोड 100 वीडियोज को एक अरब बार से अधिक देखा गया है ।
कारलोज पेरेज द्वारा निर्देशित म्यूजिक वीडियो “डेसपैसिटी”को सर्वाधिक बार यानी 4•82अरब बार देखा गया है ।
ईरान चीन और उत्तर कोरिया में यह यानी यू ट्यूब प्रतिबंध है ।
इसका मतलब यह हुआ कि आप यदि वहां रहते हैं तो आपको यह सुविधा चाहकर भी नही मिलेगी ।

तो मेरे प्यारे दोस्तों यह थी चर्चा यू ट्यूब के 13 साल के होने की ।आशा है आपको जरूर अच्छी लगी होगी ।

धन्यवाद
लेखक :के पी सिंह
14022018

जी हां दोस्तो
मैं कुछ लिखूं ।इसके पहले मुझे एक शेर याद आ रहा है ।
लोग कहते हैं कि हम दुनिया बदल देंगे
एक हम हैं नाम तक बदला नही जाता
लेकिन आज यहां पर मैं जिसकी बात करना चाहता हूं वह इस शेर में फिट नही बैठते थे क्योंकि कि वह उन बेचारे लोगों में नही थे जिनके लिए यह शेर लिखा गया था ।
वह सचमुच बहादुर थे,महान थे।शायद यही कारण था कि उन्हें अपने जीवन में जो भी अच्छा लगा उसे वह अपनी इच्छा शक्ति से पाकर रहे ।

द ग्रेटेस्ट कौन थे?

यह बहुत ही रोचक और सराहनीय है कि विश्व विख्यात अमेरिकी मुक्केबाज मुहम्मद अली को अपना नाम ही जब पसंद नही आया तो उन्होंने
इसे ही बदल दिया और अपने मूल नाम जो था “कैसियस मरसेलुस क्ले जूनियर”को छोड़कर नया नाम मुहम्मद अली रख लिया और चूंकि वह खुद को ही बहुत ज्यादा प्यार करते थे इसलिए अपने इस नये नाम मुहम्मद अली के आगे “द ग्रेटेस्ट”जोड़ दिया ।इस प्रकार उनका नया नाम “मुहम्मद अली द ग्रेटेस्ट” हो गया ।लोगों ने जब इस नाम परिवर्तन की असली वजह पूछी तो उन्होंने बिना किसी लागलपेट या संकोच के साफ साफ कहा था कि उन्हे अपने से गुलामी की बू आती थी इसलिए उन्होंने इस गुलामी को ही मिटा दिया है ।क्योंकि मुझे गुलामी पसंद नहीं ।

“द ग्रेटेस्ट” के द ग्रेट कारनामे

जिस तरह मुहम्मद अली खुद को द ग्रेटेस्ट कहते थे उसी तरह उनके ग्रेट कारनामे भी थे अंतरराष्ट्रीय महान मुक्केबाज मुहम्मद अली ने निहायत विपरीत परिस्थितियों मे खुद को महान बनाने में सफलता प्राप्त की थी ।यह बात दीगर है कि 4जून 2016 को अमेरिकी शहर फीनिक्स में जीवन भर हार न मानने वाला महान मुक्केबाज पार्किन्सन से हार गया था ।और अपने पीछे छोड़ गया था लाखों लाख उन बातों को जो उन्हें महान बनाने में मदद करती हैं ।वह कितने महान थे आप इस बात का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि क्रिकेट के भागवान तेंदुलकर ने जब इन्हें श्रद्धापूर्वक अंतिम विदाई दी थी तो कहा था कि मुझे जिन बातों का जीवन भर अफसोस रहेगा उनमें बहुत कम बाते हैं और जो हैं भी उनमें सबसे खास बात यह है कि मैं मुहम्मद अली से मिलने को तरसता रह गया और वे असमय चल बसे ।

क्यों थे ग्रेट मुहम्मद अली द ग्रेटेस्ट?

विश्व मुक्केबाजी के नायाब हीरे मुहम्मद अली यूं ही सिर्फ नाम के ग्रेट नही थे बल्कि वे सचमुच काम के भी ग्रेट थे ।12 साल की उम्र में मुक्केबाजी शुरू करने वाले ग्रेटेस्ट ने महज 22 साल की उम्र मे इतिहास का उलटफेर करते हुए 1964 में सोनी लिसटन को हराकर विश्व हैवीवेट चैम्पियन का खिताब जीत लिया था ।और हां इसी जीत के बाद उन्होने अपना नाम भी बदल डाला था।सन 1964 के बाद उन्होने 1974और1978मे भी इस खिताब को अपने नाम किया था ।

सिर्फ तन से नही मन से भी मजबूत थे ग्रेटेस्ट

जी हां दोस्तों मुहम्मद अली सिर्फ मुक्के से ही मजबूत नही थे वह मन से भी बेहद मजबूत थे
इसका प्रमाण यह है कि जब उन्होंने अमेरिकी सेना में भर्ती होने से इन्कार कर दिया था तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था लेकिन वह चूंकि वियतनाम युद्ध के खिलाफ थे इसलिए टूटे नही बल्कि अपनी जिंदगी में आए इन काले दिनों में भी उजाले को तलाशते रहे ।अमेरिकी सेना में भर्ती न होने के कारण उन्हें केवल गिरफ्तार ही नही किया गया बल्कि उनका हैवीवेट टाइटल भी छीन लिया गया था ।इस लिए वह चार साल तक फाइट भी नही कर सके बावजूद इसके युद्ध विरोधी व रंगभेद पीड़ित उन्हें अपना हीरो मानते थे ।यह तो ईश्वर की कृपा थी कि सन 1971 में अमरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा पलट दी और ग्रेटेस्ट को न्याय मिला ।

अद्भुत ग्रेटेस्ट उर्फ जिन्दा दिल जिन्दाबाद

छह फीट तीन इंच लम्बे मुहम्मद अली ने अपने जीवन में कुल 61 फाइट में भाग लिया ।इन फाइटो में वह 56 में विजयी रहे थे ।विशेष बात यह है कि इन 56 फाइट में 37 का फैसला नाक आउट के जरिए हुआ था ।वह यदि अपने फैसले के प्रति कठोर थे तो अपने राष्ट्रीय कर्तव्य के लिए समर्पित भी थे ।उन्होने ईराकी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन से अपने देश के पनदरह लोगो को छुड़ाने के लिए मुलाकात भी की थी।
उनकी अद्भुत जिजीविषा का एक और प्रमाण तब मिला था जब उन्हें अटलांटा ओलम्पिक मे मशाल जलाने के लिए आमंत्रित किया गया था ।सोचा जा रहा था कि शायद वह अपने स्वास्थ्य कारणों से इस कार्य को सम्पन्न करने के लिए उपलब्ध न हो सकें लेकिन दुनिया उस समय स्तब्ध रह गई जब द ग्रेट ने अपने कांपते हुए हांथों से मसाल जला कर अपने ग्रेट होने का प्रमाण दे दिया था ।

धन्यवाद
लेखक :केपी सिंह
15022018

ब्लैक बॉक्स का आविष्कार किसने किया था?

महान उपलब्धि है ब्लैक बॉक्स

दोस्तों या तो आपने खुद विचार किया होगा या फिर किसी ने आप से पूछा होगा कि जब भी दुनिया के किसी कोने में विमान हादसा हो जाता है तो सबसे पहले यही प्रयास क्यों किया जाता है कि ब्लैक बॉक्स को सबसे पहले सुरक्षित रखने की बात क्यों की जाती है ?
लेकिन यदि इस विषय मे आपने किसी से या आप से किसी ने नही भी पूछा तो भी आपके मन में यह जिज्ञासा जरूर होगी कि आखिर ब्लैक बॉक्स की हकीकत क्या है
दोस्तों आप निश्चित रहें आप को आज यह जानकारी मैं अपनी अगली पंक्तियों मे ही देने वाला हूं कुछ इस तरह,,,,

ब्लैक बॉक्स और डेविड वारेन

जी हां दोस्तों आज जिस ब्लैक बॉक्स की हम यहां चर्चा कर रहे हैं उसका आविष्कार आस्ट्रेलिया के महान साइंटिस्ट डेविड वारेन ने सन 1950 के दशक में किया था ।वारेन मेलबोर्न के एरोनाटिकल रिसर्च लेबोरेट्रीज में काम करते थे ।संयोग से उसी समय पहला जेट आधारित कामर्शियल एयरक्राफ्ट “कामैट” दुर्घटना ग्रस्त हो गया था ।वारेन दुर्घटना की जांच करने वाली टीम में शामिल थे ।
तभी उनके मन में एक ख्याल आया कि क्यों न कोई ऐसा यंत्र हो जो विमान हादसे के बाद काफी समय तक दुर्घटना के कारणों को सहेज कर रखे ।।
सच कहें तो ब्लैक बॉक्स अर्थात फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर के निर्माण का कार्य तभी प्रारंभ हुआ था ।इसके बाद वह दिन भी आया जब आस्ट्रेलिया को विश्व में प्रथम बार कामर्शियल एयरक्राफ्ट में ब्लैक बॉक्स या फिर फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर लगाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ ।
और इस तरह दुनिया में ब्लैक बॉक्स का जन्म हो गया

ब्लैक बॉक्स वास्तव में क्या है?

किसी विमान हादसे की वजह का पता लगाने में दो डिवाइस बेहद महत्वपूर्ण होते हैं ।एक है एफडीआर यानी फ्लाइट डाटा रिकार्डर और दूसरा है सीवीआर यानी कॉकपिट वाइस रिकार्डर ।इसे ही ब्लैक बॉक्स कहा जाता है ।एक में कॉकपिट के अंदर की बातचीत रिकॉर्ड होती है तो दूसरी डिवाइस या सीवीआर में विमान से जुड़े आंकड़े जुटाए जाते हैं ।
ब्लैक बॉक्स का एक रोचक तथ्य यह है कि इसका रंग काला नही होता बल्कि इसका रंग नारंगी होता है ।ब्लैक बॉक्स में पानी और आग का कोई असर नहीं होता ।और तो और 20 हजार फुट दूर से इसका पता लगाया जा सकता है ।यद्यपि ब्लैक बाक्स की बैट्री केवल तीस दिन तक चलती है लेकिन इसके डाटा को सालों-साल रखा जा सकता है।

ब्लैक बॉक्स कुछ खास

ब्लैक बॉक्स को विमान मे पिछले हिस्से में लगाया जाता है ।क्यों कि यह दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना की स्थिति में यहां सबसे ज्यादा सुरक्षित होता है ।ब्लैक बॉक्स को कई महत्वपूर्ण टेस्ट से गुजरना पड़ता है ।उदाहरण के तौर पर ब्लैक बॉक्स रिकार्डर L3FA2100 ग्यारह सौ डिग्री सेल्सियस फायर में कई घंटे और 260 डिग्री सेल्सियस हीट में 10 घंटे तक रह सकता है ।
इतना ही नहीं यह माइनस 55से 70 डिग्री सेल्सियस तापमान पर भी बिना किसी रुकावट के काम करता है ।1960 में आस्ट्रेलिया पहला ऐसा देश था जहां विमानों में ब्लैक बॉक्स लगाना सख्त अनिवार्य था ।जहां तक बात भारत की है तो यहां नागर विमानन महानिदेशालय के नियमों के अनुसार 1जनवरी 2005 से सभी विमानों और हेलीकॉप्टरों में FDR तथा CVC का लगाया जाना अनिवार्य किया गया था ।

दुर्घटना के बाद
ब्लैक बॉक्स की प्राप्ति

हादसे के बाद जब विमान का ब्लैक बॉक्स मिल जाता है तो विशेषज्ञ उसे सीधा लैब ले जाते हैं।इसके बाद हादसे के कारणों की सूक्ष्म जांच की जाती है ।जिन यंत्रों इसमे महत्वपूर्ण भूमिका होती है उनमें प्रमुख हैं टावेड पिंगर लोकेटर25और ब्ल्यूफिन21 ।लोकेटर25 सिग्नल को 6000 मीटर तक की गहराई से ढूंढ लेता है तो वहीं ब्ल्यूफिन21 4500 मीटर की गहराई से ब्लैक बॉक्स को ढूंढ कर लाता है ।ध्यान रहे ब्ल्यूफिन21 को अंडर वाटर ड्रोन भी कहा जाता है ।

ब्लैक बॉक्स कुछ खास

ब्लैक बॉक्स में दुर्घटना से 25 घंटे पहले तक का रिकॉर्ड होता है
ब्लैक बॉक्स में अंडर वाटर लोकेटिअंग डिवाइस होती है जो 14000 फीट नीचे से सिग्नल भेज सकती है
ब्लैक बॉक्स को धातु के चार लेयर या परत में रखा जाता है
ब्लैक बाक्स की चार लेयर इस प्रकार होती हैं
एल्युमीनियम,सूखा बालू,स्टेनलेस स्टील और सबसे बाद मे टाइटेनियम ।
ब्लैक बॉक्स कॉकपिट के अंदर होने वाली सभी बातचीत,रेडियो कम्युनिकेशन, उड़ान का विवरण जैसे स्पीड, इंजन की स्थिति, हवा की गति, विमान की उंचाई, रडार की स्थिति आदि को रिकॉर्ड करता है ।

धन्यवाद
लेखक :के पी सिंह
13022018

दुनिया को स्मार्ट बनाने वाले खास आविष्कार भाग -3

दोस्तों अब हम अपने लेख “दुनिया को स्मार्ट बनाने वाले खास आविष्कार” की तीसरी कड़ी में आ गए हैं।इसलिए यहां पर हम कुछ और चर्चा न करके सीधे अपने लेख की अगली कड़ी में पहुचते हैं

फोटोवोलटिक सौर ऊर्जा

फोटो वोलटिक प्रभाव की खोज वैज्ञानिकों द्वारा सन 1800 में कर ली गई थी और औद्योगिक क्रांति के दौर के कुछ कारखाने सौर शक्ति का प्रयोग भाप के उत्पादन में करते थे ।लेकिन आज बेहद बड़े पैमाने पर व्यावसायिक सौर ऊर्जा संयंत्र मौजूद हैं

पवन ऊर्जा

ऊर्जा पैदा करने वाली इस तकनीक का प्रचीन इतिहास है ।संसार में पहली पवन चक्की का उल्लेख सर्व प्रथम 200 ईसा पूर्व मिलता है ।आधुनिक पवन ऊर्जा के आन्दोलन को गति 1970 के दशक में ऊर्जा संकट के बाद मिली

सोशल नेटवर्किंग

सोशल नेटवर्किंग बेवसाइट अपनी दो विशिष्टताओं के कारण जानी जाती है इनमें प्रोफाइल और मित्र सूची कम आकर्षक नही है
सन् 1997 में लांच हुई सिक्स डिग्री डाट काम सबसे शुरूआती सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट थी।माई स्पेस का उदय इसके बाद ही हुआ था ।

ग्राफिक यूजर इंटरफेसGUI

जी यू आई के पिता कहलाने वाले डगलस इंगलबारट ने 1968 में इसकी खोज की थी इसमें एक सीआईटी डिस्प्ले ,दो की बोर्ड और पहला माउस था ।इअंगलबारट के काम से प्रेरित होकर बाद में कई लोगों ने जीयूआई के डिजाइन को परिष्कृत करने में अहम भूमिका निभाई ।।

डिजिटल फोटोग्राफी /वीडियोग्राफी

तस्वीरों का शुरुआती डिजिटल स्वरूप ही वीडियो के अस्तित्व का कारण बना था ।1970 में पहला सालिड स्टेट वीडियो कैमरे का प्रोटोटाइप तैयार हुआ लेकिन 1981 में सोनी द्वारा तैयार किया गया मैविका स्टिल कैमरा वास्तव में एक वीडियो कैमरे की तरह था ।1980 के दशक के आखिर में मेगा पिक्सल सेंसर के विकास और वीडियो के भंडारण में सुधार के साथ डिजिटल फोटोग्राफी और वीडियो ग्राफी को व्यावसायिक रूप में आसान बनाया ।

रेडियो फ्रीक्वेंसी आई डेटिंटी फिकेशन

दूसरे विश्व युद्ध के समय इस तकनीक का उपयोग विमान पहचान में किया जाता था ।1970 के दशक में RFID का पहला पेटेंट कराया गया ।स्वचालित पथकर भुगतान प्रणाली में इस तकनीक के प्रयोग किए जाने के बाद 1980 के दशक में इसका व्यावसायिक रूप सामने आया था ।आज दुनियाभर के तमाम खुदरा विक्रेता इसका प्रयोग सूची बनाने में कर रहे हैं ।

जेनेटिकली माडीफाइड जीएम प्लांट्स

सन 1980 के दशक में ग्रेग जान मेडल के प्रयोग मे प्राकृतिक विकास स्वरूप जी एम पौधों का विकास हुआ ।1994 में पहले जीएम पौधे के रूप में कैलीफोरनिया मे टमाटर की एक प्रजाति विकसित कर बाजार में उतारी गई थी ।ज्यादा उत्पादन,रोग प्रतिरोधक क्षमता के चलते आज इन फसलों का बोलबाला है ।।

जैव ईंधन

इनका शुरुआती इतिहास रूडोलफ डीजल के जमाने से है जिन्होने अपना पहला इंजन मूंग फली के तेल से चलाया था ।1908 में हेनरी फोर्ड ने माडल टी नामक इंजन बनाया जो एथनॉल से से चलता था ।हालाकि जल्दी ही इन आविष्कारको को यह लग गया था कि पेट्रोल ईंधन का सबसे सशक्त माध्यम बन रहा है ।।।लेकिन आज फिर से पर्यावरण के मुद्दे के कारण जैव ईंधन का उद्योग तेजी से बढ रहा है ।।।

एटीएम

आटोमेटेड टेलर मशीन का शुरुआती संस्करण 1960 के दशक में आया था ।लेकिन तब इनसे रकम निकालने को लेकर बाध्यताओं का बोलबाला था ।लेकिन 1970 के दशक में चुम्बकीय पट्टी वाले कार्ड्स का विकास हुआ तधा कम्प्यूटर से जुड़ने के बाद इसके प्रयोग को गति मिली थी ।
आशा है इन बेमिसाल आविष्कारों के बारे में जानकर आपको खुशी मिलेगी ।आपका
धन्यवाद।।।।।।
।।।।लेखक के पी सिंह
13022018

👉कब मनाये ये त्यौहार:-  महाशिवरात्रि व्रत एवं पूजा विधि 

महाशिवरात्रि का त्यौहार फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को ही मनाया जाता है, परंतु इस वर्ष चतुर्दशी 13 एवं 14 फरवरी को होने के कारण सभी लोग इस बात से असमंजस्य में पड़े हुए है। लेकिन शिवपुराण के अनुसार श्रवण नक्षत्र युक्त चतुर्दशी व्रत के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है।महाशिवरात्रि व्रत एवं पूजा विधि

जो कि तिथि 13 फरवरी की रात से 11:34 से लग जायेगी और अगले दिन 14 फरवरी को रात 12:47 तक रहेगी। 14 फरवरी को नक्षत्र सुबह  4:56 से शुरू हो जायेगा, अतः महाशिवरात्रि 14 फरवरी को मनाना ही सर्वोत्तम है।

पूजा मुहूर्त:-

महाशिवरात्रि व्रत एवं पूजा विधि के मुहूर्त सुबह

14 फरवरी को प्रातः काल से ही सुबह 7 बजे से ही पूजा शुरू कर देनी चाहिए।

जो लोग पंडित जी से पूजा कराते है उनके लिए पूजा के खास मुहूर्त का समय।

प्रथम पूजन- सुबह 7 बजे से प्रारंभ करें।

द्वितीय पूजन- 11:15 से प्रारंभ करें।

तृतीय पूजन- दोपहर 3:30 से प्रारंभ करें।

चतुर्थ पूजन- शाम 5 :15 से प्रारंभ करे।

पंचम पूजन- रात्रि 8:00 बजे से प्रारंभ करें।

षष्ठ पूजन – रात्रि 9:30 से प्रारंभ कीजियेगा।

चार प्रहर पूजन का समय – गोधूलि बेला से प्रारंभ करके ब्रह्म मुहूर्त तक करना चाहिए।

पूजन विधि:-

महाशिवरात्रि व्रत एवं पूजा विधि

सर्वप्रथम अपने ऊपर जल छिड़के,फिर हाथ धो लें।

फिर पूजन का संकल्प करके श्री गणेशजी और माता पार्वती जी का ध्यान करें।

भगवान को रोली,चन्दन,सिंदूरचावल,फूल , चड़ाए इसके बाद हाथ मे बिल्वपत्र एवं अक्षत लेकर भगवान शिव का ध्यान करें।

भगवान शिव का ध्यान करके शिवजी को आसन प्रदान करें।

जल से स्नान कराकर दूध स्नान, दही स्नान ,घी स्नान एवं शहद स्नान करावें।फिर सुगन्धित जल से स्नान कराए।

प्रसाद चढ़ाये  अब भगवान शिव जी को जनेऊ चढ़ाये फिर वस्त्र पहनाकर उनको रोली चावल पुष्पमाला एवं मुख्य रूप से बिल्वपत्र अवश्य चढ़ाये।

महाशिवरात्रि के दिन शिवजी का स्रंगार मुख्य रूप से करें क्यों कि इस दिल शिव जी का विवाह हुआ था।

इसके बाद दीपक और धूप जलाकर शिवजी को नैवेद्य एंव विविध प्रकार के फलो का भोग लगावे। एवं ॐ नमः शिवाय मन्त्र का जाप करते रहें। इसके बाद पान सुपारी लोंग इलायची नारियल एवं दक्षिणा चढ़ाकर आरती करें।

इसप्रकार से घर में पूजा करना चाहिये जिससे भगवान शिव प्रसन्न होते है और घर के सभी लोगों को अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

तो बोलो ॐ नमः शिवाय

तो इसप्रकार महाशिवरात्रि व्रत एवं पूजा विधि से आप ये त्यौहार मनाए।

दुनिया को स्मार्ट बनाने वाले खास आविष्कार भाग-2

दोस्तों इस लेख के पूर्व मैने आपको दुनिया को स्मार्ट बनाने वाले खास आविष्कारों के बारे में बताया था ।उसी क्रम को बढाते हुए कुछ और ऐसे ही आविष्कारों की चर्चा करने के लिए प्रस्तुत है उसी लेख की आगे की कड़ी अर्थात
दुनिया को बदल देने वाले खास आविष्कारों की प्रस्तुति का भाग दो–

ओपेन सोर्स साफ्टवेयर

इसका मतलब यह है कि बिना किसी प्रतिबंध के आपरेटिंग सिस्टम तैयार करना ।रिचर्ड स्टाल मैन ने इस प्रोजेक्ट की शुरूआत 1984 में की थी ।पहले मुफ्त साफ्टवेयर लाइसेंस का प्रकाशन भी इन्होने ही किया था ।फलस्वरूप इसके आगे लिनक्स, मोजिला विकीपीडिया आदि जारी किए गए थे ।

ल ई डी
लाइट इमीटिंग डायोडस

शीतल प्रकाश उत्सर्जित करने वाले इन छोटे स्रोतों के साथ यद्यपि 1900 के शुरूआती वर्षों से ही प्रयोग हो रहा था लेकिन यह तकनीक 1960 से पहले अव्यवहारिक ही थी ।याद रखें कैलकुलेटर पहला उत्पाद है जिसमें एल ई डी का प्रयोग किया गया ।1970/80 के दशक में तमाम उपकरणों तथा वाहनों में इसे लगाया गया ।

एल सी डी
लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले

यह तकनीक सन 1980 के उत्तरार्ध में पहली बार मानव खोज अभियान में शामिल की गई थी ।लेकिन यह भी सच है कि 1960 से पहले वैज्ञानिकों को बिजली के उपयोग द्वारा क्रिस्टल के साथ जटिल स्वरूप तैयार करने की जानकारी नही थी ।1970 के दशक में पहली एलसीडी तैयार की गई थी ।और उसके बाद यह इस कदर प्रसिद्ध हुई कि आज इसका प्रयोग घड़ी, टीवी, कम्प्यूटर वाहनों के साथ-साथ अन्य उत्पादों में भी किया जाने लगा है ।

दुनिया को स्मार्ट बनाने वाले खास आविष्कार भाग-2

कई उपग्रहों के नेटवर्क द्वारा धरती पर किसी स्थान विशेष को सटीक रूप से चिन्हित करना इस तकनीक का कमाल है।1993 में अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा 24 उपग्रहों के जीपीएस को आनलाइन लाया गया था।यद्यपि इसकी कल्पना सैन्य विभाग के लिए की गई थी लेकिन आज गैर सैन्य कार्यों में इसकी बहुतायत में जरूरत महसूस की जाती है ।आज इसी कारण यह क्षेत्र एक उद्योग की सकल ले चुका है।।कार घड़ी,मोबाइल, फोन हर जगह इस डिवाइस का प्रयोग देखा जा सकता है ।

ई कॉमर्स
आनलाइन शापिंग

आज इलेक्ट्रॉनिक कामर्स इलेक्ट्रॉनिक डाटा इंटर चेंज के बाहर विकास कर रहा है।1960 /70 के दशक में कंपनियां लेन-देन कम्प्यूटर माध्यम से करती थीं ।1980 के दशक में कम्प्यूसर्व ने अपने उपयोग कर्ताओं के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक माल तैयार किया लेकिन यह उपयोग कर्ताओं के अनुकूल नही था ।वहीं 1990 के दशक में ज्यों ही वर्ल्ड वाइड वेब और ब्राउज़र की खोज की गई तो ई कामर्स को आसमान छूने में समय नही लगा ।

मीडिया फाइल कम्प्रेशन

1970 के दशक में कम्प्यूटर वैज्ञानिकों द्वारा टेक्स्ट फाइलों को स्टोर करने के लिए इस तकनीक का विकास किया गया था ।सन् 1980 में कमेटी आफ एक्सपर्ट ने लोकप्रिय कम्प्रेशन स्टैंडर्ड तैयार किया जिसे आज हम जेपीईजी और एमपीईजी के नाम से जानते हैं

माइक्रोफाइनेंस

गरीबों या फिर कम आय वालों तक वित्तीय सेवाएं सुलभ कराने वाली यह अवधारणा सदियों से चली आ रही है ।लेकिन 1980 के दशक में इसने एक विस्तृत रूप ले लिया ।बांग्लादेश के अर्थशास्त्री मुहम्मद यूनुस ने ग्रामीण बैंक की स्थापना करके इसी के चलते ग्रामीणों में उम्मीदों की किरण ही जगमगा दी है ।

लेखक के पी सिंह
Kpsingh9775@gmail.com
13022018

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