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ब्लॉग और ब्लोगिंग क्या है ? और कैसे मिलता है इससे पैसा ?

नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम एस०पी०सिन्ह है और मैं आज आपको ब्लॉग या ब्लॉगिंग के बारे में बताऊंगा !अर्थात ” ब्लॉग और ब्लोगिंग क्या है ? और कैसे मिलता है इससे पैसा ?

दोंस्तों जैसे कि हम सभी जानते है आजकल अच्छे पढ़े-लिखें युवा वर्ग को पर्याप्त नौकरी या पैसे कमाने के संसाधन नहीं मिल रहे है, जिससे युवा पीड़ी अपने जीवन को लेकर काफी परेशान नजर आते है! नौकरी के नाम पर केबल कम्पटीशन ही मिलता है और लगातार नौकरियों के फोरम भर-भर कर कुत्तों से भी बेकार हालत हो जाती है और कभी – कभी तो नौकरी के नाम पर कुछ कम्पनियाँ तो अपने कर्मचारियों की हालत कुत्ते से भी बेकार कर देती है, मैं भी उन्ही में से एक हूँ और मैंने भी अपनी लाइफ में बहुत ही ख़राब जिन्दगी का सामना किया है ! तो दोंस्तों आज मैं आप को एक ऐसा आसान और सही तरीका बताने जा रहा हूँ, जिससे आपको कभी किसी की गुलामी यानी नौकरी भी नहीं करनी पड़ेगी और आपको आपके पसंदीदा काम को करने से पैसे भी बहुत अच्छे मिलेंगे, जी हाँ! आज हम आपको इस इन्टरनेट की दुनिया के उस हिस्से से अवगत करने वाले हैं जिसने लाखों लोगों को रोजगार दिया है और अब आप भी उस रोजगार को कर सकते है | तो चलिए अब हम सीदे अपने टॉपिक पर आते है | ” ब्लॉग और ब्लोगिंग क्या है ? और कैसे मिलता है इससे पैसा ?

क्या होता है ब्लॉग? और कैसे  करते है ब्लोगिंग ?

हम सभी ने बहुत से ब्लॉग को अब तक पढ़ा है लेकिन कभी हमने ये नहीं सोचा की जो चीज हम पढ़ रहे है उसी को ब्लॉग कहते है, जी हाँ! अभी आप इस आर्टिकल को पढ़ रहे है ये भी एक ब्लॉग Post ही है और ऐसी ही तमाम Post जिस वेबसाइट पर पड़ी होती है उसको ही ब्लॉग कहते है| ब्लॉग एक पर्सनल डायरी की तरह होता है, जिसमे हम अपने रोजाना की घटित घटनाओ, ख़ुशी, गम, अपने काम और अन्य क्रिया- कलापों का विवरण लिखते है, वैसे ही ब्लॉग होता है, लेकिन ये इन्टरनेट पर बनी एक वेबसाइट के रूप में होता हैं जिसमें हम ऐसी जानकारी लिखते है जो लोगो को पढ़ने में अच्छी लगे या कोई इन्फोर्मशन देते है जिसका उपयोग लोग अपने दैनिक जीवन में करते है, अर्थात अब आप समझ चुके होंगे की ब्लॉग किसे कहते है | आप जो इस post को पढ़ रहे है ये भी एक ब्लॉग ही है और आज में अपनी इस ब्लॉग post के माध्यम से ब्लॉग या ब्लोगिंग की जानकारी दे रहा हूँ!

अब बात करते है ब्लोगिंग की, जैसे की अभी मैंने आपको बताया की ब्लॉग किसे कहते है, ऐसे ही जो व्यक्ति ब्लॉग लिखता है और उसके लिखने को ही ब्लोगिंग कहते है, जैसे की मैं इस ब्लॉग पर अपने post लिखता हूँ तो में ब्लोगिंग कर रहा हूँ|

ब्लॉग या ब्लोगिंग से क्या फायदा होता है?

ब्लॉग या ब्लोगिंग से क्या फायदा होता है, जैसे की आप जानते ही होंगे, जब तक इंसान को कोई फायदा न हो वो कोई काम नहीं करता है वैसे ही ब्लोगिंग है, ब्लोगिंग से लोगों को आप नई-नई जानकारी देंते है,जिनको लोग पढ़ते है और इन्टरनेट पर तो लाखों लोगो तक आपकी कोई भी post बहुत जल्दी वायरल हो जाती है ! तो बस जैसे ही आपकी post वायरल होना शुरू हो गयी मानों अब आपकी किस्मत चमकाने वाली है, जिस वेबसाइट पर हम ब्लोगिंग करते है, ऐसी वेबसाइट बहुत जल्दी ही advertising से जुड़ जाती है और अनेकों कम्पनियाँ आपको अपने ads लगाने के लिए न्योता देती है, और अगर आपकी ब्लॉग या वेबसाइट पर ads आना शुरू हो गये तो मानो आपकी कमाई भी शुरू होगई और अब आपकी post को जितने ज्यादा लोग पढेंगे उतना ज्यादा आपको इनकम होगा! (इसे भी पढ़े : कैसे पायें सफलता )

कैसे करें ब्लोगिंग स्टार्ट : 

वैसे तो ब्लोगिंग कोई भी कर सकता है लेकिन फिर भी यहाँ पर आपको कुछ चीजों का ध्यान रखना होगा, अगर आप सच में एक सफल ब्लॉगर बनना चाहते है और देश के कुछ गिने चुने ब्लोग्गेर्स की लिस्ट में शामिल होना चाहिते है जो अपने ब्लॉग से हर महिना 30 से 40 लाख रुपये बड़े ही आराम से कमा रहे हैं, तो आपको नीचे दी हुयी कुछ टिप्स को जरूर फॉलो करना होगा:

  1. सबसे पहले आपको एक वेबसाइट का चुनाव करना होगा जिसके साथ आप ब्लॉग्गिंग शुरू करना चाहते है और ध्यान रहे वो वेबसाइट ऐसा होना चाहिए की वह पर ज्यादा से ज्यादा लोग विजिट करते हो, क्योकि ब्लॉग्गिंग के लिए जो सबसे जरूरी चीज है वो है, आपके रीडर्स यानी आपके ब्लॉग को पड़ने वाले.
  2. अगर आप कुछ वेबसाइट के एक्सपर्ट है तो आप अपना खुद का भी वेबसाइट बनाकर ब्लॉग्गिंग शुरू कर सकते है, लेकिन और आप वेबसाइट के एक्सपर्ट नहीं नहीं तो भूल कर भी अपना वेबसाइट बनाकर ब्लोगिंग मत करना क्योंकी, वेब एक्सपर्ट ही आपको post को लोगो तक पहुंचता है और तभी ज्यादा से ज्यादा लोग आपको post को पड़ते है, इसके अलावा भी 15 से 20 ऐसे काम होते है एक ब्लोगिंग की वेबसाइट पर की एक वेब एक्सपर्ट ही कर सकता है कोई लेखक या ब्लोगेर नहीं !
  3. अपना ब्लॉग लिखने से पहले अपने टॉपिक का चुनाव सही से कर लें आपक टॉपिक पुराना और घीसा-पीता नहीं होना चजिये जो लोगो को इंटरेस्टिंग ना लगे अगर ऐसा होता है तो आपको सफलता नहीं मिलेगी.
  4. आपके ब्लॉग में लिखी हुयी चीज कहीं से कोपी की हुई ना हो, अगर आप किसी और की वेबसाइट या इन्टरनेट से कोई जानकारी चुरा कर अपने ब्लॉग पर डालते है, तो आपको इसका हर्जाना भी भरना पड़ सकता है और आपको ब्लॉग हमेशा के लिए ब्लोक हो सकता है और आपको कोई इनकम भी नहीं मिलेगा|
  5. आप अपने ब्लॉग में जो कुछ भी लिख रहे हो वो क्रमबद्ध तरीके से और साफ़ सुथरा होना चाहिए और आवश्यकता होने पर जगह – जगह फोटो और अन्य जरूरी जानकारी, लिंक आदि को भी अपने ब्लॉग में लगाना चाहिए!
  6. अपनी post को पब्लिश करने से पहले आपको उसका एक बार प्रीव्यू जरूर देख लेना चाहिए और पूरा ध्यान से पद्लेना चाहिए जिससे कोई स्पेलिंग या लेखन की गलती ना रह जाए|
  7. ब्लोगिंग के लिए आपकी  एक post में कम से कम 300-400 शब्द जरूर होने चाहिए, इससे कम शब्दों के ब्लॉग को गूगल इंडेक्स नहीं करता है|
  8. कुछ लोग गूगल को बेबकूफ बनाने की कोशिश करते है और दुसरे लोगो के कंटेंट को अपने ब्लॉग पर डाल देते है तो आप ऐसा न करें, जो लोग ऐसा करते है वे बहुत जल्दी ही अपने ब्लॉग से हमेशा के लिए हाथ धो बैठते है क्योकि गूगल ऐसी पोस्ट्स को इंडेक्स ही नहीं करता है और ब्लाक करता जाता जिससे आपके दर्शकों और पाठकों तक आपकी post पहुँचती ही नहीं है और आपकी इनकम भी नहीं होती है!

तो दोस्तों आगे में आपको और भी जानकारी देता रहूँगा ब्लॉग और अन्य ऑनलाइन और ऑफलाइन पैसे कमाने के बारें मैं और अधिक जानकारी के लिए नीचे मैंने अपना एक विडियो दिया हुआ है उसको देखिये फिर आपको सब कुछ क्लियर  हो जायेंगा. अगर आपको ये जानकारी अच्छी लगी हो तो आप इसको अपने दोस्तों के साथ फेसबुक और whats app पर शेयर जरूर करें| धन्यवाद!

लेखक: एस०पी०सिन्ह

https://www.youtube.com/watch?v=D5Ho6hfYzms

 

असली प्यार क्या है ?

प्यार शब्द हमेशा अधूरा होता है तथा ये हमेशा से दुखद अनुभव प्राप्त होता है क्यूंकि प्यार का पहला अक्षर ही अधूरा है जो हम आज तक समझ ही नही पा रहे है हम अपने से ज्यादा दूसरों में प्यार पाने की उम्मीद दिलों में बसाये हुए है।जो व्यक्ति अपने आप से प्यार कभी नही किया वो साप्ताहिक प्यार वेलेंटाइन डे में ढूंढता है। जिस दिन से व्यक्ति अपने-आप से प्यार करने लगेगा उसे आत्मज्ञान,सकारात्मक सोच,उम्मीदों और बंधनों से परे एक खूबसूरत एहसास मिलेगा।

एवरेस्ट की उंचाई पर मची रार 

हमने बहुत पहले यह अपनी किताबों में यह पढा था कि एवरेस्ट दुनिया की सबसे ऊंची चोटी का नाम है ।इसकी उंचाई भी हमने कई बार परीक्षा में लिखने या जनरल नॉलेज की हाजिर जवाबी के लिए भी रट लिया था ।जैसे ही किसी के मुंह से एवरेस्ट की कुल ऊंचाई सुनते थे, हमारा खुद का ज्ञान तपाक से कहता था, जी हां 8848 ।सुनने वाला खुश और सुनाने वाला भी खुश हो जाता था लेकिन आज ऐसा नही है ।आज किसी को यह नही पता कि इतने साल गुजरने के बाद आखिरकार वास्तव में दुनिया की नंबर एक चोटी कही जाने वाली चोटी एवरेस्ट की ऊंचाई कितनी

एवरेस्ट की उंचाई तब से अब तक 

पहली बार एवरेस्ट की उंचाई मापने का कार्य 1952 में किया गया था ।यह कार्य यद्यपि भारत के पूर्व महासरवेक्षक सर जार्ज एवरेस्ट की निगरानी में हुआ था लेकिन बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि यह कार्य वास्तव में एक भारतीय युवा गणितज्ञ राधा नाथ सिकदार ने किया था ।मानव कम्प्यूटर भी राधा नाथ को कहा जाता था क्यों कि उनकी गणित की गणना बेमिसाल थी ।एक और खास बात जानना जरूरी है कि उस समय एवरेस्ट का नाम एवरेस्ट नही था ।तब इसका नाम XV चोटी था ।इस प्रकार जब एक्स वी चोटी की उंचाई नापने का काम 1856 में पूरा हुआ तो इसका नाम एवरेस्ट और इसकी कुल उंचाई 29002 फीट घोषित की गई ।

नेपाल में सागर माथा के नाम से जाने जानी वाली एवरेस्ट का कुछ हिस्सा तिब्बत यानी अधिकृत चीन मे भी पड़ता है ।याद रहे 1856 के बाद सन 1950 में एवरेस्ट की उंचाई नापने का दोबारा काम हुआ और तब इसकी ऊंचाई 29029 फीट बताई गई और तभी इसे दुनिया की सबसे ऊंची चोटी घोषित किया गया था ।

सन् 2005 में चीनी अधिकारियों ने इस चोटी को एक बार फिर से मापा तो बवाल मच गया नेपाली और चीनी अधिकारी चूकि एक दूसरे से सहमत नही थे बवाल इसी लिए मच गया था ।हालांकि बाद में चीनी अधिकारी इसे 29017 फीट घोषित करवाने में कामयाब रहे थे ।बाद मे पता चला कि एवरेस्ट की यह माप तिब्बत की तरफ से तो ठीक है लेकिन नेपाल की तरफ से कम है ।बाद में नेपाली मत को वरीयत प्राप्त हुई ।

एवरेस्ट और नया मसला 

एवरेस्ट को लेकर काफी समय से चल रहा सब कुछ ठीक ठाक मामला अचानक तब गड़बड़ हो गया जब दो हजार पन्द्रह में भूकंप की त्रासदी घटित हुई ।इसके बाद कुछ भूवैज्ञानिक यह मानने लगे कि एवरेस्ट की उंचाई कम हुई है तो कुछ भूवैज्ञानिक यह मानने लगे कि भारतीय भू प्लेट खिसकने की वजह से इसकी इसकी उंचाई बढी है क्योंकि कि काठमांडू घाटी 80 सेमी तक उठ गई है ।साथ ही कुछ विचार इस तरह के भी हैं कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से चूंकि बर्फ पिघल रही है इसलिए भी सागर माथा थोड़ा झुका है ।आप को बता दें कि जो उंचाई हम जानते हैं 8848 मीटर वह भारतीय भूवैज्ञानिको की देन है जिसे मान्यताप्राप्त है एवरेस्ट की उंचाई के तौर पर जिसे खुद चीन ने 1975 में मान्यताप्राप्

 

 

 

पकौड़ा शास्त्र की सच्चाई

दोस्तों नमस्कार
यद्यपि मुझे पकौड़ा शास्त्र की शुरूआत में ज्ञान नहीं था इसलिए मैं इस विधा पर कुछ बोलने से घबराता था लेकिन कुछ महान लोगों की कृपा से अब मुझे काफी जानकारी हो गई है जैसे अब मुझे इस बात की भली-भांति ज्ञान हो गई है कि आजकल जितने भी तथाकथित वीर सपूत में इस देश में बड़ौदा बनाने के लिए उत्सुक हैं लगभग सभी उच्च कोटि के नाक प्रतिनिधि हैं।
यानी जो काफी दिनों से इस फ़िरक में बैठे थे कि कुतुर्क का कोई मौका हाथ लग रहा है और हम हमेशा की तरह अपने हवाई फायरिंग शुरू करते हैं तो उनकी यह शानदार उपलब्धि है कि वे अपनी कुतुर्क के झोंके के मार्ग में न केवल ढूंढ ली हैं बल्कि वह अपनी मकसद की मुहेन में झंडा फहरा रहे हैं। ईश्वर की कृपा से आजकल यह बहस काफी गति से गतिशील है

पकौड़ा शास्त्र की विशेषता

सबसे बड़ी विशेषता तो यही है कि यहां पर सभी लोग इस तरह के कथित बहादुर पढ़े गए लोग हैं जो भत्ता की भाषा को समझते हैं परन्तु उद्यमी के कोहरा न तो जानते हैं, न जानना चाहते हैं। परम प्रतापी यह फेसबुक
भक्त जन नौकरी की माला जपते जपटे यह भूल गए कि भत्ता के बरसास काफी पहले खत्म हो गया है।

इस परम आनंद दायक में बहस में पकौड़ा शास्त्र की अगली विशेषता यह है कि यहां वही भटकती आत्मा के इष्ट जन घूम घूमते हुए पिकाड़ा की धूम मचाने की फ़राक में हैं जो पहले तो माँ बाप की कमाई में महज डिग्री कमाया है और आज अपनी डिग्री को देख रहा है देखकर खुश होने की प्रगतिशील चिंता में चिंतित हैं
यह वही कारीगर प्रकार के लोग हैं जो ज़िन्दगी के लिए नौकरी तलाशने के लिए शपथ पत्र के साथ आप सभी को लगभग सभी घूमती गली में इतिहास रचते हुए पाए जाते हैं।

पकौड़ा शास्त्र की नीयत

आने वाले समय में यह पक्वाड़ा विक्रेता कितने और किस प्रकार के पकौड़े बनाकर अपनी डिग्री का सामुदायोग करे तो यह पता नहीं है लेकिन यह इस बात को निश्चित रूप से पता है कि पकौड़ा शास्त्र इन्हें शायद ही कभी दो जून की रोटी कमाई योग्य बनती है पाएगा
दोस्तों पकौड़ा शास्त्र मे कुछ लोग पीएचडी डिग्री होल्डर हैं जिन्होने अपनी जिंदगी में पकौड़ा के अलावा कुछ न तो सोचा है और न ही सोचने का भयंकर इरादा विज्ञापन सक्रिय नहीं है ते हैं।

विडंबना और पक्ड़ा

दोस्तों असली दुर्भाग्य इस देश में काम का संकट नहीं है। बल्कि असली संकट यह देश की बुद्धि है, जिस पर यह डौलती मंडली कुंडली मार कर इस तरह की बात है कि जब मौका मिले और वह रोजगार नहीं है, तो यह सब गलत तर्कों से समाज के समक्ष गीत संगीत के साथ प्रस्तुत कर के कहीं का इट कुछ तो रोड़ा भानुमती ने कुनबा जोड़ा
को बकाइदा साबित किया

पकौड़ा निष्कर्ष

निश्चय यह है कि यह सब लोग जो बक्कोड़ा आंदोलन के हमराही हैं,
रोजगार नहीं हैं लेकिन केवल माला जपाना को जानते हैं। आगे बढ़ने के लिए रोजगार की खोज
या फिर खुद को रोजगार पैदा करना
सोचना तक नही चाहते।

धन्यवाद
लेखक: के पी सिंह
केपीएसिंगह 9775@gmail.com
मोबाइल 9651833 9 83

आओ ज़रा बात करो 

क्या हम विज्ञान और प्रौद्योगिकी के गुलाम बन चुके हैं ? जब बात विज्ञान और प्रौद्योगिकी का हो तो सबसे पहले विज्ञान और प्रौद्योगिकी की बात करना बेहद जरूरी है क्योंकि पहले यह जानना जरूरी है कि यह दोनों एक ही हैं या अलग अलग हैं। जब हम विज्ञान की बात करते हैं तो विज्ञान किसी भी विषय का क्रम बद्ध और सुव्यवस्थित ज्ञान को कहने के लिए, जब बातों की तकनीक बनती है तो हमारा तात्पारी उत्पादन की विधियों से होता है, जिससे वस्तुओं का निर्माण होता है।

यदि हम अपने चारों ओर देखें तो हमें विज्ञान ही विज्ञान चारों तरफ दिखता है। यह सचमुच अच्छा है लेकिन यहां तक ​​कि एक सवाल भी पैदा होता है कि आधुनिक मनुष्य का इस प्रकार केवल और केवल विज्ञान की तकनीक का दम पर अपनी सुबह और अपनी शाम को समर्पित करना मानव हित में उचित है?

इस सवाल का आशय यह है कि हम सुबह से शाम तक जिस तरह दैनिक जीवन के बेहद साधारण कार्य से लेकर प्रोफेशनल कामों तक जिस तरह तकनीक के आदी हो चले हैं क्या यह उचित है? क्या हम एक ऐसे घर की कल्पना कर सकते हैं जिस घर में पंखा कूलर टीवी एसी गीजर लैपटॉप माइक्रोवेव जैसी साधारण चीजें न हों ।

ईमानदारी से जवाब दें तो शायद इसका जवाब होगा बिल्कुल नहीं क्यों कि यह सत्य किसी से छिपा नही रह गया है कि हम प्रकृति प्रदत्त जीवन निरंतर भूलते जा रहे कमाल की बात यह है कि हम फिर भी  बेखौफ अपनी मस्त चाल में मदमस्त हैं ।

हम और हमारा दैनिक जीवन

हम देख सकते हैं कि हमारे चारों तरफ विज्ञान और प्रौद्योगिकी का ही बोलबाला है चाहे वह सुरक्षा व्यवस्था मे प्रयुक्त प्रौद्योगिकी हो या फिर स्वास्थ्य सेवाओं में प्रयुक्त प्रौद्योगिकी हो या फिर शिक्षा में शामिल प्रौद्योगिकी हो या फिर आर्थिक उत्पादन में प्रयुक्त होने वाली प्रौद्योगिकी हो या फिर परिवहन के क्षेत्र की प्रयुक्त प्रौद्योगिकी हो या फिर राजनैतिक क्षेत्र में प्रयुक्त होने वाली प्रौद्योगिकी ही क्यों न हो ।

ध्यान देने की बात यह है कि मेरा तात्पर्य यह नही है कि हमें इन आधुनिक सुविधाओं का फायदा नहीं उठाना चाहिए बल्कि मेरा तात्पर्य यहां केवल यह है कि हमें कबीर दास जी के इस दोहे का स्मरण करना चाहिए

अति का भला न बरसना! अति की भली न धूप!!

आओ बात करें कबीर की सीख की

यहां पर हमारा विवाद का आशय है कि जब से हम खुद को विकसित किया गया है, तब से प्रौद्योगिकी का हवाला दिया, तब से हमारी अपनी शारीरिक विकास प्रभावित है अगर एक तरफ चिकित्सा विज्ञान का फायदा हुआ तो चिकित्सा विज्ञान की ज़रूरत की अनावश्यक दबाव भी मैं झेल रहे हैं

जो जीने की शैली के लिए सच में ज़रूरत है शायद उसे हम या तो छोड़ चुके हैं या छोड़ने वाले हैं। शुक्र से शाम तक केवल तकनीक का बल पर अपना समय गुज़राना वाला शायद भूल गया है  विज्ञान और प्रौद्योगिकी

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रोंगटे खड़े कर देने वाला मंदिर

विश्व में चमत्कारों से भरा देश अगर है तो वो है – हमारा देश भारत | भारत में आधे से ज्यादा चमत्कार तो नंदिरों में होते हैं | यहाँ बहुत से ऐसे चमत्कारिक मंदिर हैं जो अपने -आप में ही अद्भुत और आश्चर्य का विषय बने हुए हैं | इन्हीं चमत्कारों से भरे मंदिरों में से एक है – मेंहदीपुर बालाजी का मंदिर

भारत में हनुमानजी के लाखों मंदिर हैं और हर मंदिर की अपनी महिमा है पर राजस्थान के दौसा जिले में स्थित घाटा मेंहदीपुर बालाजी मंदिर हर मायने में अद्भुत है |अगर किसी को भूत – प्रेत ने अपने वश में कर रखा है और छुटकारा नहीं मिल पा रहा है तो मेंहदीपुर बालाजी का मंदिर इन सब भूत – प्रेतों से छुटकारा दिलाने का सबसे उत्तम स्थान है | मेंहदीपुर बालाजी को दुष्ट भूत – प्रेतों से छुटकारा दिलाने के लिए दिव्य शक्ति से प्रेरित हनुमानजी का बहुत शक्तिशाली मंदिर माना जाता है |

यहाँ आते ही आपको ऐसे – ऐसै नजारे दिखेंगे कि आप चौंक जायेंगे | यहाँ कई पीड़ित लोगों को जंजीर से बांधकर और उल्टा लटकते हुए आप देख सकते हैं | यह मंदिर और इससे जुड़े चमत्कार देखकर कोई भी हैरान हो सकता है | जब शाम को इस मंदिर में आरती होती है तो भूत – प्रेत से पीड़ित लोगों को देखा जाता है | बताते हैं कि कई सालों पहले हनुमानजी और प्रेत राजा अरावली पर प्रकट हुए थे | भूत – प्रेत और काला जादू से ग्रसित लोगों को यहाँ लाया जाता है और वो सभी बाधाओं से मुक्ति पा लेते हैं |
कहते हैं इस मंदिर को इन पीड़ाओं से मुक्ति का एक मात्र मार्ग माना जाता है | यहाँ के पंडित इन रोगों से मुक्ति पाने का बहुत सारे उपचार बताते हैं और मंगलवार व शनिवार के दिन यहाँ लाखों लोगों को आते हुए देखा जा सकता है | कई गंभीर रोगियों को लोहे की जंजीर से बांधकर यहाँ लाया जाता है | भूत – प्रेत से पीड़ित लोगों को इस मंदिर में लाते समय यहाँ का दृश्य इतना भयानक हो जाता है कि सामान्य लोगों की रूह तक काँप जाती है | ये पीड़ित लोग मंदिर के सामने चिल्ला – चिल्लाकर अपने अंदर बैठी बुरी आत्माओं के बारे में बताते हैं, जिनसे इन पीड़ित लोगों का दूर – दूर तक कोई वास्ता नहीं होता है | इस मंदिर में भूत और प्रेत बाधाओं के निवारण के लिए यहाँ आने वालों का ताँता लगा रहता है | ऐसे पीड़ित लोग बिना तंत्र – मंत्र और बिना दवा के स्वस्थ लौटते हैं | बालाजी के मंदिर में प्रातः और संध्या लगभग चार चार घंटे आरती होती है |

अगर इस मंदिर के इतिहास को देखें तो यह भी जानने को मिलता है कि मुस्लिम शासन काल में मुगल बादशाहों ने इस मंदिर की मूर्तियों को नष्ट कर देने का प्रयास किया था, परन्तु हर बार बादशाह असफल रहे | वो इसको उखाड़ने के लिए जितना खुदवाते गए, मूर्ति की जड़ उतनी ही गहरी होती चली गई | अन्त में वो थक हारकर अपना ये कुप्रयास छोड़ दिया | कहते हैं ब्रिटिश शासन काल के दौरान सन् 1910 में बालाजी ने सैकड़ों वर्ष पुराना अपना चोला स्वयं ही त्याग दिया था, फिर भक्तजन इस चोले को लेकर मंडावर स्टेशन पहुँचे जहाँ से इस चोले को गंगा में प्रवाहित करना था, पर ब्रिटिश राज में ब्रिटिश स्टेशन मास्टर ने चोले को निःशुल्क ले जाने से रोका और उसका लगेज ( luggage) कराने लगे और सबसे ज्यादा हैरत की बात तो तब हुई जब चोले का वजन कभी ज्यादा बढ़ जाता तो कभी कम हो जाता | यह देखकर स्टेशन मास्टर असमंजस में पड़ गया और अन्त में चोले को नमस्कार कर निःशुल्क ले जाने को कहा | इसके बाद बालाजी को नया चोला चढ़ाया गया और एक बार फिर नये चोले से एक नई ज्योति दीपमान हुई | ( इसे भी पढ़िये – लोक प्रिय बनें, मगर कैसे? ??)

बालाजी के अलावा यहाँ श्री प्रेतराज सरकार और श्री कोतवाल कप्तान भैरव की मूर्तियाँ हैं |श्री प्रेतराज सरकार दण्ड अधिकारी के पद पर आसीन हैं | प्रेतराज सरकार पर भी चोला चढ़ाया जाता है | प्रेतराज सरकार दुष्ट आत्माओं को दण्ड देने वाले देवता के रुप में पुजा जाता है, भक्तिभाव से उनकी आरती होती है | चालीसा, भजन, कीर्तन आदि भी किये जाते हैं |बालाजी के सहायक के रुप में ही प्रेतराज सरकार की उपासना की जाती है | प्रेतराज सरकार को पके चावल का भोग लगाया जाता है |
कोतवाल कप्तान श्री भैरव देव भगवान शिव के अवतार हैं और शिव की तरह ही भक्ति भाव से थोड़ी पुजा से ही प्रसन्न हो जाते हैं | भैरव जी महाराज चतुर्मुखी हैं | उनके हाथों में त्रिशूल, डमरू, खप्पर और प्रजापति ब्रह्मा का पाँचवा कटा शीश है | उनकी मुर्ति पर चमेली के सुगन्धित तेल में सिन्दूर घोलकर चढ़ाया जाता है | प्रसाद के रूप में बालाजी को लडडू, प्रेतराज सरकार को चावल और कोतवाल कप्तान भैरव को उड़द का प्रसाद चढ़ाया जाता है | इस प्रसाद में से दो लड्डू रोगी को भी खिलाया जाता है, शेष सब पशु – पक्षियों को डाल दिया जाता है | ऐसा कहा जाता है कि पशु – पक्षियों के रूप में देवताओं के दूत ही इस प्रसाद को ग्रहण करते हैं | यहाँ के प्रसादों का लड्डू खाते ही रोगी व्यक्ति झुमने लगता है और भूत – प्रेत खुद ही उसके शरीर में चिल्लाने लगते हैं | कभी वो अपना सिर धुनते हैं तो कभी जमीन पर लोटने लगते हैं | यहाँ का मंजर देखकर आपके रोंगटे खड़े हो जायेंगे | प्रेत के अलावा सामान्य मनुष्य के बस की बात यह नहीं है | बाद में पीड़ित व्यक्ति खुद ही बालाजी के शरण में आ जाता है और हमेशा के लिए इस तरह की बाधाओं से मुक्ति पा लेते हैं |

(इसे भी देखिये – How to Get Success with splcwo Live Show By SPSINGH )

यह मंदिर केवल भूत – प्रेत से पीड़ित लोगों के लिए ही नहीं है | सामान्य आदमी भी यहाँ आकर तीनों देवों की आराधना कर सकते हैं | अनेकों भक्त देश विदेश से बालाजी के दरबार में मात्र प्रसाद चढ़ाने के लिए आते हैं | इतिहासकारों के अनुसार यहाँ के एक विशाल चट्टान में हनुमानजी की आकृति स्वतः ही उभर आई थी | इसे ही हनुमानजी का स्वरूप माना जाता है | इसके चरण में एक छोटी कुण्डी है जिसका जल कभी समाप्त नही होता | यह मंदिर काफी चमत्कारिक माना जाता है इसलिए यह मंदिर केवल राजस्थान में ही नहीं बल्कि देश विदेश में भी विख्यात है |

लेखक – प्रमोद कुमार

मो – 7250508856

लोक प्रिय बनें, मगर कैसे? ??

दोस्तों हम में से सब लोग लोकप्रिय बनना चाहते हैं।शायद ही संसार में कोई ऐसा भी व्यक्ति हो जो लोकप्रिय न बनाना चाहता हो ।सच्चाई यही है कि क्या राजा क्या रंक सभी न केवल लोकप्रिय होना चाहते हैं बल्कि सबसे ज्यादा लोकप्रिय होना चाहते हैं ।हर व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्र मे इस कदर प्रसिद्ध होना है कि भले ही इसके लिए उसे कुछ भी करना पड़े ।संसार में कुछ ऐसे भी उत्साहित लोग देखे गए हैं जो अपना नुकसान करने को भी तैयार हैं बस उन्हें कोई प्रसिद्ध होने का सर्टीफिकेट दे दे ।

सवाल उठता है कि क्या यह तरीका प्रसिद्ध पाने के लिए सही है कि हम अपना खुद का नुकसान भी कर लें प्रसिद्ध होने के लिए ? जी नही यह तरीका बिल्कुल सही नही है क्योंकि  इतिहास में जो भी लोकप्रिय लोग हुए हैं उन्होने इस तरीके को अपनाने के बारे मे कभी नही सोचा ।

लोक प्रिय लोग लोकप्रिय यूं ही नहीं बने 

दोस्तों महान लोगों का एक खास गुण होता है और वह है बड़प्पन को बांटना ।उनके सम्पर्क मे जो भी आता है वह उसे अपने आचार विचार से यह समझाने में सफल होते हैं कि उनके लिए आप का बेहद महत्व है ।अर्थात महान लोग जिससे भी मिलते हैं उसकी उतनी ही कदर करते हैं जितने खुद अपने लिए वह उस नए मिलने वाले व्यक्ति से करते हैं ।महान लोग किसी महानता की डिग्री को हासिल नही करते लेकिन वह हर मनुष्य की वैल्यू जरूर करते हैं फल स्वरूप उनके संपर्क में आने वाला हर व्यक्ति उन्हें श्रेष्ठ और महान माने बिना नही रह सकता ।यही है लोकप्रिय बनने की पहली सीढी ।।।दूसरी सीढी के रूप में आप इसे ले सकते हैं कि लोकप्रिय लोग लगभग हर व्यक्ति को अपना समझते हैं मेरा पराया के भाव से बहुत चिपके न होकर बहुत दूर होते हैं ।इसका परिणाम यह होता है कि लोग चाहकर भी उन्हें भूल नही पाते और इस तरह उनकी लोकप्रियता आसमान की बुलंदियों की ओर बढ जाती है ।

लोक प्रिय बनने की ओर 

जी हां दोस्तों महान लोग या लोकप्रिय लोग अपने फायदे के लिए किसी का नुकसान नही करते बल्कि वह अपना घाटा कुबूल करके भी किसी दूसरे को कष्ट या क्षति पहुंचाने के बारे में कभी नही सोचते ।हमारे इतिहास में सैकड़ों उदाहरण हैं जिनके अनुसार जिन लोगों ने इस मिट्टी की दुनिया में अपनी पहचान को बनाए रखा है वह आगे चल कर महान लोगों की श्रेणी में शामिल हुए ।क्योंकि जो इस संसार के तीन तिकड़म से खुद को उबार नहीं पाते उनका खुद का वास्तविक अस्तित्व मिटते देर नही लगती ।।।

सकारात्मक लोक प्रियता और दुनिया 

ध्यान देने की बात है आजकल दो तरह के लोग प्रसिद्ध पाते हैं अथवा लोकप्रियता हासिल करते हैं एक सकारात्मक लोग होते हैं तो दूसरे नकारात्मक लोग होते हैं ।सकारात्मक लोग लोगों की पीड़ा खत्म करते हैं तो नकारात्मक लोग लोगों को हर हाल में पीड़ा देने की फिराक में रहते हैं ।।आप को यह भली-भांति जान लेना चाहिए कि आप सिर्फ सकारात्मक  आचरण से लोकप्रिय बने तभी श्रेष्ठता है वर्ना प्रसिद्ध तो वह बदमाश भी हो जाता है थोड़े दिन के लिए जो किसी दिन पुलिस की गोली का शिकार भी हो जाता है ।।।

धन्यवाद

लेखक

केपी सिंह

Kpsingh 9775 @Gmail. Com

 

 

सुना है कि तू बेवफा हो गया है

दोस्तों
यह मेरी शिकायत आप से नही है और न ही किसी अन्य व्यक्ति से यह मेरी कोई खास शिकायत है बल्कि इसकी सच्चाई यह है कि
वर्तमान में यूपी के भाजपा विधायक जनों की शिकायत है और वह भी प्रदेश सरकार और उसके तमाम बड़े अधिकारियों से ।यह शिकायत कितनी गम्भीर है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि माननीय योगी जी को अपने रूठे हुए और साथ ही तमतमाए हुए माननीयों को समझाने के लिए बाकायदा एक आयोजन करना पड़ा ।इतना ही नहीं सरकार को सम्मान का सम्मन भी अधिकारियों के नाम निकालना पड़ा अर्थात राज्यादेश जारी करना पड़ा ।

अपमान की हकीकत

मामला एक पीड़ा से प्रारंभ होता है ।सरकारी गैर सरकारी विधायकों का कहना है कि जब भी वह जनता के किसी काम से अफसरों से रूबरू होते हैं तो यह अधिकारी
न ही तवज्जो देते हैं और न ही यह सम्मान देते हैं ।।जब कि हम लोकतंत्र की रक्षा करने वाले जनप्रतिनिधि हैं हमें सम्मान और खास तवज्जो मिलने का संवैधानिक अधिकार है
बजट सत्र के पूर्व योगी सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी माननीयों को यह बताने की कोशिश की है कि वह निश्चित रहें ।आप को तवज्जो और सम्मान सरकारी अधिकारियों से मिलेगा यह
शासन के आदेश के द्वारा सुनिश्चित कर दिया गया है ।

सच के आइने में सामाजिक हकीकत

ध्यान से देखें तो यह पतन की पराकाष्ठा की तरफ बढती एक सामयिक समस्या प्रतीत होती है लेकिन ऐसा नही है।सच यह है कि जिन माननीयों को अधिकारियों से दिक्कत है वह वास्तव में स्वंय ही किसी दिक्कत से कम नही हैं ।यह बात जनता भी जानती है और अधिकारी भी कि वर्तमान में कोई व्यक्ति विधायक अपने सदाचार से नही बनता बल्कि इसके लिए छल बल खल सब की महती भूमिका होती है ।
जो माननीय विधायक बनने के लिए पार्टी को चंदा देने के नाम पर टिकट की ज्यादा से ज्यादा कीमत देते हैं वह कितने सम्मान के पात्र हैं यह जानना बेहद जरूरी है क्योंकि यह लोग सचमुच जनता के प्रतिनिधि नही बल्कि किसी पार्टी के दलाल या एजेंट खुद को ज्यादा साबित करने वाले होते हैं ।
जो अधिकारी अपने जीवन में सिर्फ अपनी मेहनत के बल पर इस प्रतिष्ठित पद पर पहुचा है क्या उसके लिए सम्मान नही व्यक्त किया जाना चाहिए ।जब प्रशासन के
सामने ही जनता के तथाकथित प्रतिनिधि लोकतंत्र के साथ बेहयायी करते हैं तो आप ही बताइए क्या ऐसे लोग किसी से सम्मान की उम्मीद कर सकते हैं

सुना है कि सचमुच तू बेवफा है

सच तो यह है कि आज लोकतंत्र की दुहाई देने वाले इस देश में बहुत कुछ लोकतांत्रिक या सम्मानीय नही है ।जिन लोगों को समाज के सामने खुद को एक उदाहरण के रूप में पेश होना चाहिए वह रातों रात पाला बदल कर बेवफा से वफादार और वफादार से बेवफा बन जाते हैं ।मजे दार यह है कि नेता इसके बाद भी सम्मान का भूखा रहता है यह काबिले तारीफ है ।क्योंकि कोई हिम्मत वाला ही खुद असम्मानित आचरण करके
दुनिया से सम्मान की गारंटी मांग सकता है

सम्मान की लड़ाई मे जीत किसकी होनी चाहिए

सवाल उठना स्वाभाविक है कि इस सम्मान की तथाकथित लड़ाई मे किसे जीत मिलनी चाहिए और किसे सम्मान की लड़ाई में हारना चाहिए ।दोस्तों यह रोचक और ध्यानाकर्षक सवाल है जिसका जवाब भी तलाशना बेहद जरूरी है ।क्योंकि सम्मान सब के लिए बेहद जरूरी है ।राजा हो या रंक बिना सम्मान के सबका जीवन जीवन नही कहलाता ।इसे सरल शब्दों में कहें तो सम्मान सब के जीवन का अपरिहार्य अंग है
जहां तक मेरे दृष्टिकोण की बात है तो वह बिलकुल साफ है और वह यह है कि इस लड़ाई में शामिल दोनों योद्धाओं को सम्मान मिलना चाहिए ।यदि जनप्रतिनिधि जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं तो लोक सेवक भी लोक के प्रतिनिधि हैं और यह भी जनता के लिए ही कार्य सम्पादन करते हैं
काम और महत्व के तल पर आप तभी कुछ खास हो सकते हैं जब आप सचमुच जनता का कल्याण ज्यादा सरल बना रहे हों ।

अगर एक विधायक जो जनता की सेवा के लिए चुना गया है और वह जनविरोधी कार्यों में संलिप्त है तो उसे सम्मान नही सम्मन ही मिलना चाहिए ।ठीक इसी प्रकार जनता की सेवा के लिए सक्षम समझे गए किसी लोक सेवक में यदि अक्षमता पायी जाती है तो वह भी सम्मान नही सम्मन का ही अधिकारी है ।”सुना है कि तू बेवफा हो गया “जैसी खास बहस के निष्कर्ष में इतना ही कहा जा सकता है कि सम्मान पाने का अधिकारी वही है जो खुद सम्मानित आचरण का प्रतिनिधित्व करता हो ।। सुना है कि तू बेवफा हो गया है

धन्यवाद
लेखक :के पी सिंह
Kpsingh 9775@gmail.com
Mobile 9651833983

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भारतीय समाज में पंचायत की व्यवस्था किसी को नहीं है लेकिन नहीं तो यदि हमारे बारे में बात करें तो यह व्यवस्था हमारे देश में वैदिक समय से ही गतिशील हो रहा है।
हां यह सच है कि उनके रूप बदलते हैं.हमारा वर्तमान लोकतंत्र प्रणाली वास्तव में इसी महत्वपूर्ण व्यवस्था का आधुनिकीकरण है जिसका प्रतीक है हमारे राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में स्थित हमारे सांसद भवन …
लेकिन सवाल उठता है कि क्या सचमुच आज हम जो संसद को पता है, यह हमारे राष्ट्रीय महापंच है?
या फिर क्या सचमुच हमारा संसद सचमुच हमारे लोकतांत्रिक सभ्यता का प्रतिनिधित्व करने के लिए जगह है? ???
इस तरह के हमारे प्रश्नों को पैदा करने का कारण है हमारे वर्तमान लोक सभा का परंपरा लगातार कम होना होगा
आज हालात यह हैं कि हमारे प्रधान मंत्री अपनी महत्वपूर्ण व्याख्यान दे रहे हैं तो हमारे विपक्ष के जिम्मेदार सांसद शोरशराबे में मस्त हैं सलवा भी यह है कि प्रति व्यक्ति करीब दस लाख रुपये खर्च कर रहे हैं इस लोकसभा व्यवस्था में यह बनावट अवरोध आखिर क्यों?
क्या सांसद भवन में बैठे हैं और लाखों जन-समुदाय का प्रतिनिधि क्या सच में अपनी आचरण से देश और देश के जनता के साथ न्याय कर रहे हैं?
प्रश्न यह भी है कि क्या सांसद भवन के अंदर घटित होने वाली इन अनावश्यक गतिविधियों से हमारे राष्ट्रीय महापंचत की गरिमा का छल नहीं होगा।
क्या सचमुच हमारा संसद हमारे महान पंचायत है यह सवाल पैदा हो रहा है एक कारण यह भी है कि हमारे जनप्रतिनिधि लगातार संसदीय आचरण को भी त्याग कर रहे हैं .माम रिपोर्ट यह बताता है कि कभी-कभी संसद भवन में ऐसा विचित्र माहौल भी देखा जब कोई राष्ट्रीय महत्व का विषय में बहस का बयामी कम करने तक पूरा करने का संकट खड़ा हो जाता है।
बदलते समय जनसाधारण की आकांक्षा ही यही है कि हमारे जनप्रतिनिधि ऐसा व्यवहार करना सचमुच हमारे धरोहर सिद्ध हो। मुझे याद है कि एक बार जब पूर्व राष्ट्रपति श्री अब्दुल कालम के मुलाकात एक स्कूल गए थे तो किसी ने ऐसा सवाल किया था कि राष्ट्रपति को जवाब देने में असहजता महसूस भी की थी
जी हां दोस्तों वहां किसी बच्चे ने राष्ट्रपति महोदय से यह पूछा था कि
“सर रोज रोज राजनैतिक प्रतिनिधित्व क गिरते आचरण को देखते हुए हमें बताइए कि हम किसके जैसा बनें ? ?? “
राष्ट्रपति को इस प्रश्न के उत्तर में कठिनाई हुई है कि वहां लगातार गिरते हुए संसद की गरिमा ने खुद को भी यही प्रश्न पैदा किया था कि
क्या सचमुच हमारा संसद देश का सबसे बड़ा पंचायत है? ?
सबसे बड़ा पंचायत कहने का आशय, उसके क्षेत्रफल से नहीं, लेकिन
कथाकार प्रेम चंद्र की सर्वकालिक कहानी पंचायत में वर्णित है कि पंचायत गरिमा से है जिसमें एक कुटिल व्यक्ति की आकांक्षा में मातमी डालकर एक सार्वभौमिक सत्य की प्रतिष्ठा करना गरिमा को स्थापित किया गया था ..
यदि आज यह प्रश्न पैदा हुआ है कि
वास्तव में हमारे पंचायत में हमारा सबसे बड़ा पंचायत है तो इसका जवाब भी हमारे राष्ट्रीय का प्रतीक संसद से ही ौरव आना चाहिए क्योंकि मैंने सुना है कि
सच्चाई का सबसे प्रयोग उसका प्रयोग है न कि उसकी महिमा मंडन …।
धन्यवाद
लेखक: के पी सिंह
Kpsingh 9775@gmail.com
मोबाइल: 9652833983
08022018

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